दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने अपने 24 साल के लंबे क्रिकेट के करियर के अनुभव को साझा करते हुए कई दिलचस्प बाते साझा की है। सचिन तेंदुलकर ने बताया कि कैसे उन्होंने अपने जीवन में डर और चिंता का सामना किया। चिंता उनके करियर का एक अहम हिस्सा रहा है और मैच से पहले किस तरह से यह उनके लिए बाधा खड़ा करता है। जीवन में इसी डर का कैसा सामना करना है इसकी अहमियत को तेंदुलकर ने समझा और मानसिक स्वास्थ्य को जीवन का अहम हिस्सा बनाया। इसे भी पढ़ें- जिस बल्लेबाज से आगे बढ़कर खेलना सीखा, उसी को रॉबिन उथप्पा ने मैदान में जमकर सुनाया
10-12 साल तक तनाव से लड़े
सचिन ने कहा कि एक समय के बाद मैंने महसूस किया कि शरीर से खुद को मैच के लिए तैयार करना तो जरूरी था ही साथ ही आपको मानसिक तौर पर भी खुद को फिट रखना जरूरी है। मेरे लिए मैदान में जाने से बहुत पहले ही मैच शुरू हो जाता था। चिंता बहुत ज्यादा होती थी। मैंने यह चिंता तकरीबन 10-12 साल तक महसूस की थी। कई रात मैं मैच से पहले सो नहीं पाया। इसके बाद मैंने यह स्वीकार करना शुरू कर दिया कि यह मेरी तैयारी का हिस्सा है। मैं रात को सो नहीं पाता था तो मैंने कुछ ऐसा करना शूरू कर दिया ताकि मैं खुद को स्थिर और सहज रख सकूं।
कैसे करते थे मैच की तैयारी
मैंने मैच से पहले वीडियो गेम खेलना शुरू किया, मैं खुद अपनी चाय बनाता था जिससे मुझे मदद मिलती थी। अपने कपड़े प्रेस करता था, मैं मैच से पहले अपना बैग पैक करता था, इन सब चीजों से मुझे मैच की तैयारी में मदद मिलती थी। मेरे भाई ने मुझे ये सब सिखाया और यह मेरी आदत बन गई। मैं भारत के हर मैच से पहले ये सब करता था। जब मैं चोटिल होता था तो फिजियो और डॉक्टर मुझे देखते थे और बताते थे कि क्या दिक्कत है। कुछ ऐसा ही मानसिक स्वास्थ्य भी होता है, यह सामान्य है,कोई भी जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना कर सकता है, लेकिन जब आप निराश होते हैं तो आपको लोगों की जरूरत होती है।
साझा किया विश्वकप जीतने का अनुभव
भारत ने जब 2011 में विश्वकप जीता था तो विराट कोहली, सुरेश रैना, युसुफ पठान ने सचिन तेंदुलकर को अपने कंधे पर उठाकर मैदान में घुमाया था। उस याद को ताजा करते हुए सचिन ने बताया कि वह ऐसा पल था जब विराट और युसुफ ने मुझे उठाया था, मैंने उनसे कहा था कि देखना मैं नीचे ना गिरूं। यह विश्वकप जो भारतीय टीम ने जीता था वो पूरे देश का है, यह हम सभी लोगों का है। सचिन ने कहा कि मैंने जब 1983 में कपिल देव को विश्वकप उठाते हुए देखा था तो वह अनुभव बहुत ही जबरदस्त था। मैंने अपने दोस्तों के साथ इस पल का लुत्फ उठाया था और मैं अपने सपनों को पूरा करना चाहता था। मैंने फैसला किया था कि जो भी हो मुझे अपने सपने को पूरा करना है और विश्वकप को उठाना मेरा सपना था। मुंबई के वानखेड़े मैदान में वह अनुभव बेहतरीन था, मेरे जीवन का सबसे अच्छा पल था। पूरा देश उस वक्त जश्न मना रहा था
NEWS SOURCE FROM : ONEINDIA
