हरियाणा प्रदेश में अभी तक ब्लैक फंगस के दो वरियंट मिले हैं। वहीं बड़ी बात तो ये है कि इनके लक्षण और इलाज दोनों ही अलग होते हैं। इसी कड़ी में हिसार के अग्रोहा स्थित महाराज अग्रेसन मेडिकल कालेज की लैब में ब्लैक फंगस की दो अलग-अलग तरह के वेरियंट का पता लगाया गया है। इन दोनों का व्यवहार और इलाज दोनों अलग-अलग प्रकार से होते है। ब्लैक फंगस के इन वेरियंट को दो अलग-अलग नाम असपरजिलोसिस और न्यूकोरमाइकोसिस हैं। बता दें कि असपरजिलोसिस के केस मुंबई में मिल चुके हैं। वहीं अब अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में इसके चार केस मिले हैं।
इस तरह हमला करता है ब्लैक फंगस– ब्लैक फंगस हमारी नाक में प्रवेश करके साइनिस को ब्लॉक कर देती है। यह फंगस जिस नस को ब्लॉक करती है उसके टिश्यू तक खून पहुंचना रूक जाता है और वह भाग काला पड़ने लग जाता है। गंभीर बात तो ये है कि यह फंगस मनुष्य के दिमाग तक भी पहुंच सकता है। बता दें कि अग्रोहा में भी ऐसा मामला मिला है जिसमें यह फंगस दिमाग तक पहुंचकर उसे नुकसान पहुंचा चुका है।
पहली स्टेज : नाक संबंधी लक्षण मरीज में आते हैं जैसे नाक बंद हो जाना, खून का आ जाना।
दूसरी स्टेज : साइनिस ब्लॉक होना जिससे नाक के आसापास और चेहरे पर सूनापन आ जाता है।
तीसरी स्टेज : आंख का पिछला हिस्से में यह फंगस फैल जाता है। आंख काली पड़ने शुरू हो जाती है।
चौथी स्टेज : फंगस दिमाग में चला जाता हैं और उसे खोखला करने लगता हैं।
आपको जानकारी दें दें कि ब्लैक फंगस के दो अलग-अलग प्रकार है। दोनों का ही अलग-अलग इलाज है। साथ ही इसकी पहचान होने से इलाज में आसानी होती है। अभी यहां चार ऐसे केसों की पहचान हो चुकी हैं।
