फरीदाबाद : [ मिथलेश मिश्रा ] शहरी स्थानीय निकाय विभाग में इन दिनों गजब का खेल चल रहा है। जिस अधिकारी को दंडित करने के लिए नगर निगम से सिफारिश की जाती है, रातोंरात उसे प्रमोशन दे दिया जाता है। ताजा मामला एक्सईएन विवेक गिल का है। वार्ड नंबर पांच में सीवर लाइन की सफाई के एस्टीमेट में गड़बड़ी करने के मामले में उनके खिलाफ चार्जशीट करने की सिफारिश की गई थी। सिफारिश के दो दिन बाद ही इन साहब को प्रमोट कर एसई बना दिया गया। यही नहीं उन्हें तत्काल ट्रांसफर कर गुड़गांव भेज दिया गया। स्थानीय निकाय विभाग में अचानक हुई कारस्तानी से नगर निगम में चर्चाओं का बाजार गर्म है। ये केवल विवेक गिल की ही कहानी नहीं है। इनके अलावा भी इंजीनियरिंग विभाग के कई अधिकारी इसी तरह खेल कर चुके हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के दावे करने वाली सरकार के अधिकारी किस तरह काम कर रहे है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
ये है पूरा मामला
बता दें कि वार्ड पांच में सीवर लाइन की सफाई का गलत एस्टीमेट बनाने के मामले में निगम कमिश्नर डॉ. गरिमा मित्तल ने आउटसोर्सिंग के जेई संदीप को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। जबकि एक्सईएन विवेक गिल एवं एसडीओ संदीप चौधरी के खिलाफ चार्जशीट के लिए 21 जून को सरकार से सिफारिश की थी। चार्जशीट की सिफारिश का पत्र अभी शहरी स्थानीय निकाय विभाग के पास पहुंचा ही था कि उधर स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त प्रधान सचिव एसएन राय ने विवेक गिल को प्रमोट कर एसई बनाकर गुड़गांव भेज दिया। आरोप ये है कि उक्त अधिकारियों ने 865 मीटर लंबी लाइन को कागजों में 1615 मीटर बना कर एस्टीमेट बनाया था।
दोबारा होगी एस्टीमेट की जांच
शिकायतकर्ता रामसिंह यादव का कहना है कि वार्ड पांच में सीवर लाइन की लंबाई ज्यादा दिखा कर ज्यादा बजट सेक्शन करवाने की प्लानिंग अधिकारियों ने की थी। उनकी शिकायत पर ही नगर निगम कमिश्नर डॉ. गरिमा मित्तल ने ज्वाइंट कमिश्नर एनआईटी से जांच कराई। जांच में गड़बड़ी सामने आने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। उधर वार्ड-5 की पार्षद ललिता यादव ने एस्टीमेट की दोबारा जांच की मांग की है। दोबारा से जांच एडिशनल निगम कमिश्नर वैशाली शर्मा कर रही है। खास बात ये है कि विवेक गिल की प्रमोशन के मामले को निगम अधिकारी दबाते रहे। उधर अतिरिक्त मुख्य सचिव एसएन राय का कहना है कि सिर्फ सिफारिश होने से दोष साबित नहीं होता है। जांच चल ही रही है। जांच पूरी होने के बाद ही वह दोषी और निर्दोष साबित होंगे। उनके प्रमोशन की फाइल आज से नहीं बल्कि बहुत पहले से ही चल रही थी
