
महंगाई के इस दौर में लोगों की जेब पर भार पड़ने वाला है। क्योंकि रसोई गैस सिलेंडर की सब्सिडी को लेकर सरकार ने नया प्लान बनाया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि सरकार एलपीजी सिलेंडर के लिए ग्राहकों को प्रति सिलेंडर 1,000 रुपये का भुगतान करना पड़ सकता है।बताया जा रहा है कि सरकार लगातार सब्सिडी के मुद्दे पर विचार कर रही है। लेकिन अभी तक कोई योजना नहीं बनाई है। हो सकता है कि सरकार बिना सब्सिडी के सिलेंडर सप्लाई करे या फिर कुछ चुनिंदा उपभोक्ताओं को भी सब्सिडी का लाभ दे।
सरकार सब्सिडी के लेकर विचार कर रही है लेकिन ये साफ नहीं हो पाया कि 10 लाख रुपये इनकम के नियम को लागू रखा जाएगा और उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी का लाभ मिलेगा। और बाकी लोगों के लिए सब्सिडी खत्म हो सकती है। बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2016 में गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी। भारत में लगभग 29 करोड़ से अधिक के पास एलपीजी कनेक्शन हैं, इसमें उज्जवला योजना के तहत करीब 8.8 एलपीजी कनेक्शन हैं। FY22 में, सरकार योजना के तहत एक और एक करोड़ कनेक्शन जोड़ने की योजना बना रही है। सरकार वित्तीय वर्ष 2020 में सब्सिडी पर 24,468 करोड़ रुपये खर्च किए थे। सरकार की तरफ से सब्सिडी का पैसा ग्राहक के बैंक खाते में रिफंड कर दिया जाता है।
कोरोना काल में कच्चे तेल की कीमतें गिर गईं थी। इससे भारत सरकार को एलपीजी सब्सिडी के मोर्चे पर मदद मिली क्योंकि कीमतें कम थीं और सब्सिडी को लेकर बदलाव की आवश्यकता नहीं थी। मई 2020 से कई क्षेत्रों में एलपीजी सब्सिडी बंद हो गई है, कुछ को छोड़कर जो दूर-दराज के और एलपीजी प्लाटं से दूर हैं। बता दें कि एलपीजी सब्सिडी के तहत एक परिवार को हर साल 12 सिलेंडर मिलते हैं। लेकिन मई 2020 से कुछ बाजारों में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर पर उपभोक्ताओं को शून्य सब्सिडी दी गई है। 1 सितंबर को एलपीजी सिलेंडर के दाम में 25 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी।
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