
आपने काले, सफेद या बराउन रंग के कुत्ते देखे होंगे लेकिन क्या कभी नीले रंग का कुत्ता देखा है। शायद नहीं लेकिन रूस की राजधानी मॉस्को से करीब 370 किमी दूर जररिंस्क शहर की गलियों में नीले रंग के कुत्ते देखे जा रहे हैं।दरअसल हवा से लेकर पानी में घुलते प्रदूषण की वजह से कुत्तों का रंग बदल रहा है। ऐनिमल ऐक्टिविस्ट समूहों ने शक जताया केमिकल प्लांट से निकलने वाले हानिकारक केमिकल्स प्लेक्सीग्लास और हाइड्रोसायनिक ऐसिड की वजह से कुत्तों का रंग नीला पड़ता जा रहा है।यह ऐसिड हाइड्रोजन सायनाइड के पानी में मिलने पर बनता है। जोकि बेहद जहरीला कंपाउंड होता है। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि प्लांट में अक्रेलिक ग्लास और प्रूसिक ऐसिड निकलता था और आशंका जताई गई कि कॉपर सल्फेट जैसे केमिकल्स के कारण कुत्तों के फर का रंग बदल रहा है।
हाइड्रोजन सायनाइड की वजह से सिर्फ कुत्तों का रंग बदला लेकिन इनकी सेहत पर कोई असर नहीं था लेकिन केमिकल के असर को लेकर चिंताई जाहिर की गईं है। इससे रूस में केमिकल पॉल्यूशन के मुद्दे ने भी रफ्तार पकड़ी।इस तरह के केमिकल्स त्वचा पर जलन और खुजली तो कर ही सकते हैं, शरीर के अंदर खून भी निकल सकता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो गंभीर बीमारी के कारण जान भी जा सकती है। रूस से पहले साल 2017 में भारत में भी 11 नीले कुत्ता देखे गए था।बताया गया था कि उत्पादन इकाई से निकलने वाला कचरा और डाई पास की नदी में डाला जाने लगा। और उसकी की वजह से कुत्तों का रंग नीला पड़ना शुरु हो गया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पाया कि न सिर्फ पानी बल्कि हवा में फैले प्रदूषण का असर भी मासूम जानवरों पर हो रहा था।
