
यदि एक बार में सफलता न मिले तो हमें निराश नहीं होना चाहिए क्योंकि मन में कुछ करने की चाह हो तो कभी न कभी सफलता हाथ लगती ही है। कुछ ऐसी ही कहानी है अंगद दरयानी की। अंगद 9वीं क्लास में दो बार फेल हुए, इसके महज दो साल बाद ही 16 साल की उम्र में दो कंपनियों के मालिक बन गए। यह कारनामा उन्होंने अपनी मेहनत और कुछ अलग करने के जज्बे के दम पर किया। उन्होंने अच्छे-अच्छे लोगों को अपना मुरीद बना लिया है। आज हम आपको उनकी सक्सेस स्टोरी के बारे में बताएंगे।
अंगद को ग्रेडिंग सिस्टम पर नहीं है भरोसा–
ग्रेडिंग सिस्टम की जगह वह घर पर पढ़ाई करने को बेहतर मानते हैं। अंगद बताते हैं कि जब वे 10 साल के थे, तो अपने पिता के पास गए और कहा कि वे हॉवर क्राफ्ट बनाना चाहते हैं। इसपर उनके पिता ने उनके आइडिए का मजाक उड़ाने की जगह उन्हें आगे बढ़ने की सलाह दी।
अंगद का कहना है कि उन्होंने स्कूल जाना इसलिए छोड़ दिया था क्योंकि उन्हें जिंदगी की पाठशाला से सीखने में ज्यादा मजा आता है। जब वे 9वीं कक्षा में थे तो उन्होंने स्कूल छोड़ दिया, क्योंकि बार-बार वही पुरानी किताबें पढ़ने में उन्हें मजा नहीं आ रहा था।
स्कूली शिक्षा में बच्चे नए आइडिया के बारे में नहीं सोच पाते। किताबों से रटी-रटाई चीजें याद करनी होती हैं। अंगद बताते हैं कि वो बचपन से ही नई चीजें बनाने की कोशिश करते रहे हैं। वह छोटे थे तभी टीवी शो या अपने पिता के ऑफिस के इंजीनियरों से सीखकर कुछ ना कुछ नया बनाते रहते थे। अब 16 साल की उम्र में अंगद दो कंपनियां चला रहे हैं।
एमआईटी के प्रोफेसर डॉ. रमेश रस्कर के साथ काम करते हुए अंगद और उनकी टीम ने वर्चुअल ब्रेलर भी बनाया, जो किसी भी पीडीएफ डॉक्युमेंट को ब्रेल में कन्वर्ट कर देता है। अब उन्होंने दो कंपनियां शार्कबोट थ्री डी सिस्टम्स (SharkBot 3D Systems) और शार्क काइट्स (Shark Kits) बनाई हैं। वह मुंबई की एक अन्य कंपनी Maker’s Asylum के फाउंडर सदस्य भी रह चुके हैं।
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Source News: chopaltv
