
वृन्दावन। छटीकरा रोड़ स्थित श्रीकृष्ण कॉलोनी के मुख्य द्वार पर अखिल भारतीय मानव कल्याण ट्रस्ट के तत्वावधान में गुरु नानक जयंती के पावन पर्व पर युगल जोड़ी परिक्रमा कर रहे परिक्रमार्थियों के स्वागतार्थ पूड़ी-सब्जी,मिठाई एवं फल आदि का वृहद भंडारा प्रातः 9 बजे से देर चलाया गया। जिसमें असंख्य परिक्रमार्थियों ने भोज प्रसाद ग्रहण किया। अखिल भारतीय मानव कल्याण ट्रस्ट की उत्तर प्रदेश अध्यक्ष निधि कुमारी ने कहा कि हमारा ट्रस्ट विगत 4 वर्षों से प्रतिवर्ष गुरु नानक जयंती के पुण्य पर्व पर यह भंडारा आयोजित करता है। जिसे उनके ट्रस्ट के द्वारा निःस्वार्थ एवं प्रेम भाव से आयोजित किया जाता है। ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ एम पी सिंह ने बताया गुरू नानक देव सिख धर्म के संस्थापक और सबसे पहले गुरू थे। उनकी जयंती को सिख धर्म में प्रकाश पर्व या गुरू पर्व के नाम से मनाया जाता है। ये सिख धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। इस दिन सुबह प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं और गुरू द्वारों में सबद कीर्तन का आयोजन होता है। लोग अपने घरों और गुरूद्वारों को रोशनी से सजाते हैं और शहर भर में लंगरों लगाए जाते हैं। गुरू नानक जयंति या गुरू पर्व कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मानाई जाती है। इस पावन पर्व पर नंगे पांव चल रहे परिक्रमार्थियों की भोजन प्रसादी सेवा वस्तुतः राधाकृष्ण की ही सेवा है।क्योंकि यह परिक्रमार्थी उनकी ही प्राप्ति हेतु इस मनोरथ को श्रद्धा व भक्ति के साथ पूर्ण करते हैं।
ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. हृदयेश कुमार ने कहा कि हमारी वैदिक व सनातन संस्कृति में भूखे को भोजन कराना अत्यंत पुण्य का कार्य माना गया है। इस कार्य को ट्रस्ट विगत कई वर्षों से पूर्ण समर्पण एवं श्रद्धा के साथ कर रहा है। इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाय वह कम है।
ट्रस्ट के संस्थापक डॉ हृदयेश कुमार ने गुरु नानक के जीवन पर विशेष प्रकाश डालते हुए बताया कि गुरू नानक देव जी सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरू थे। उनका जीवन और शिक्षाएं न केवल धर्म विशेष के लिए बल्की पूरी मानव जाति को सही दिशा दिखाती हैं। इसलिए ही उनके जन्म दिवस को प्रकाश पर्व के नाम से जाना जाता है। गुरू नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन 1469 ई. में हुआ था। उनका जन्म स्थान वर्तमान में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था। जहां पर आज ननकाना साहिब नाम का गुरू द्वारा है। ननकाना साहिब गुरूद्वारे का निर्माण महाराजा रणजीत सिंह ने करवाया था। गुरू नानक देव ने मूर्ति पूजा का विरोध करते हुए, एक निराकार ईश्वर की उपासना का संदेश दिया था। उन्होंने तात्कालिक समाज की बुराईयों और कुरीतियों को दूर करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। इस अवसर पर ट्रस्ट के राष्ट्रीय महासचिव महेश शर्मा ,
महासचिव चन्द्रभान शर्मा
राष्ट्रीय प्रभारी धर्मेन्द्र चौधरी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कुंवर लखन रावत, राष्ट्रीय सचिव नीलम शर्मा, राष्ट्रीय सचिव तेवतिया, राष्ट्रीय सचिव डॉ महेंद्र भारद्वाज, राष्ट्रीय सचिव सुष्मिता भौमिक, राष्टीय सचिव पूनम चौधरी , उपाध्यक्ष बंटी कोहली ट्रस्टी विमलेश देवी व लालती मिश्रा व उत्तर प्रदेश अध्यक्ष निधि चौधरी व प्रदेश सचिव सुदर्शन सिंह, प्रदेश सचिव शिव शंकर राय, सुनीता कुमारी, नीरज कुमार, वेदवीर सिंह, पुस्पेन्द्र सिंह और रानी पाण्डेय आदि की विशेष
उपस्थित रही l
