
कोविड 19 के दौर में वो समय भी आया जब कंपनियों में लॉकडाउन के कारण ताले लग गए। बाजार हो या बड़े-बड़े मॉल व शोरूम, सभी बंद हो गए। इसके कारण देश भर में अनिश्चितता का माहौल व्याप्त हो गया था। ऐसे में कई आईटी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती की। लेकिन जैसे ही लॉकडाउन खुला और अर्थव्यवस्था ने रफ्तार पकड़ी तो आईटी विशेषज्ञों की मांग भी तेजी से बढ़ी। कोविड 19 के कारण ऑनलाइन बाजार में तेजी आई। ई-ग्रॉसरी, ई-फार्मेसी, ई-हेल्थ केयर, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से नए-नए ग्राहक जुड़ने लगे।
बाजार में बढ़ी हलचल का मिल रहा फायदा
लोग अब परिवार के साथ बाहर रेस्टोरेंट जाकर खाना खाने के बजाए घर पर ही ऑनलाइन खाना डिलीवरी करने लगे। जो ऑफिस जाने वाले थे वे प्राइवेट टैक्सी के लिए ऑनलाइन कैब बुकिंग करने लगे। इन सभी काम को मैनेज करने के लिए विशेषज्ञों की तलाश आईटी कंपनियां करने लगी। ऐसे में टीसीएस, विप्रो, एचसीएल जैसी कंपनियां विशेषज्ञों को उनके पुराने वेतन पर 90 प्रतिशत अधिक वेतन के साथ अपने यहां ज्वाइन करा रहे हैं।
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एट्रिशन रेट से तकनीक हुई प्रभावित
एचआर सॉल्यूशंस फर्म टीम लीज की एक रिपोर्ट बताती है कि सितंबर तिमाही में आईटी उद्योग में औसतन नौकरी छोड़ने की दर 8.67 प्रतिशत थी। यह बड़ी आईटी फर्मों की रिपोर्ट की तुलना में बहुत कम है। विप्रेा में सबसे ज्यादा एट्रिशन रेट 20.5 प्रतिशत रहा। इसके बाद इंफोसिस में 20.1 प्रतिशत और टीसीएस में सबसे कम 11.9 प्रतिशत था। कोविड 19 के कारण जब संस्थानों पर ताले लगे तो कंपनी की छटनी दर भी बढ़ गई।
इन कारणों से कर्मचारियों ने दिया इस्तीफा
डेलॉयट इंडिया-नैस्कॉम सर्वेक्षण के अनुसार, टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल में कई तकनीकी विशेषज्ञों ने अपनी नौकरी सिर्फ इसलिए छोड़ दी कि उनके वेतन में कंपनी ने कोई बढ़ोतरी नहीं की। इसके कारण कर्मचारियों ने दूसरी कंपनियों का रूख किया। इसमें डिजिटल स्किलिंग वाले कर्मचारियों की संख्या सबसे ज्यादा है।
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भारत में तकनीकी सेवा में हुई बढ़ोतरी
भारत में तकनीकी सेवा के क्षेत्र में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2019 में यह 9.5 प्रतिशत था जो कोविड 19 के कारण वर्ष 2020 में यह गिरकर 5.2 प्रतिशत हो गया। वर्ष 2021 में आंकड़ों में फिर बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर 8.8 प्रतिशत और वर्ष 2022 में यह सबसे अधिक 11 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
फ्रेशर्स को सबसे अधिक वेतन
देश में कोविड 19 के बाद जब बाजार में तेजी आई तो तो कई नए-नए ई-कॉमर्स सेक्टर आए। इनके काम को करने के लिए हर कंपनी को आईटी विशेषज्ञों की जरूरत पड़ी। ऐसे में कंपनियों ने उन सभी विशेषज्ञों पर अपनी नजर जमाई जो दूसरी कंपनियों में कार्यरत थे। दूसरी कंपनियों के पेशेवर विशेषज्ञों को कंपनियों ने अपने यहां वर्तमान वेतनमान से 90 प्रतिशत अधिक वेतन देने को तैयार हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी कंपनियों में अगले दो से तीन तिमाही में इस तरह की स्थिति बनी रहेगी। आईटी कंपनियों को प्रतिभावान कर्मचारियों की कमी से जूझना पड़ेगा। ऐसे में कंपनियां प्रतिभावान गैर इंजीनियरों की भी तलाश कर रहे हैं और उन्हें प्रशिक्षित कर इस बढ़ती खाई को पाटने का प्रयास कर रहे हैं।
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Source News: jagran
