
कंपनी, यह शब्द सुनने पर पहला विचार आता है , शहर में बड़ा कार्यालय। सूट-बूट में कर्मचारी। छोटे-छोटे केबिन , लेकिन अब यही उन्नति गांवों के रास्तों से भी निकलती है। अंतर इतना है कि यहां इमारतों से नहीं , खेतों से आगे बढ़ने की राह निकली है। हरियाणा के कैथल में खेतीबाड़ी करने वालों ने किसानों की ऐसी ही कंपनी खड़ी कर दी है। जो अपना आलू उगाते हैं और पेप्सिको, हल्दीराम और मकैन जैसी नामी कंपनियों को सीधे बेचते हैं।
अब तो ये खुद का इंटीग्रेटेड पैक हाउस बना रहे हैं। तीन करोड़ के बजट वाला एक एकड़ में फैला यह कोल्ड स्टोर रूम इनकी फसल को खराब नहीं होने देगा। अभी यह किसान 70 एकड़ में आलू की खेती करते हैं। तीन से चार महीने की इस खेती से ये पौने दो करोड़ की टर्नओवर वाली कंपनी बन गई है। पांच साल में यह टर्नओवर पचास करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य है।
खेत में लगी आलू की फसल।
12 वीं पास किसान ने की पहल
किसानों की कंपनी बनाने की पहल की कैथल के गांव मलिकपुर के किसान 12 वीं पास गुरदयाल सिंह ने। वह अपने दो और भाइयों के साथ खेती करते हैैं। वर्ष 2010 में उनके पास ड्रिप से सिंचाई के लिए एक निजी कंपनी के लोग पहुंचे। खेत में पाइप डालकर फव्वारे से सिंचाई करने के लिए प्रेरित किया। गुरदयाल सिंह ने कहा , वह धान और गेहूं उगाते हैं। ड्रिप सिस्टम लगवा लेंगे। किसी कंपनी से मिलवाओ। कुछ और उगाना चाहते हैं। तब ड्रिप सिस्टम वाली कंपनी के सदस्यों ने गुरदयाल की पेप्सिको के अधिकारियों से मुलाकात कराई। तब से उन्होंने सीधे कंपनी को आलू बेचना शुरू कर दिया। जब वह कंपनी में देखकर आए कि किस तरह आलू से चिप्स बन रहे हैं। तब उन्होंने सोचा कि क्यों न आसपास के किसानों को इक्ट्ठा कर एक कंपनी बनाई जाए। फिर कैथल वेजिटेबल फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी बनाई , जिसमें अब अब 1016 किसान जुड़ चुके हैं।
खेत से निकाले गए आलू।
इस तरह बेचते हैं आलू
गुरदयाल सिंह बताते हैं कि वर्ष 2016 में उन्होंने बागवानी विभाग के साथ मिल कर फार्मर प्रोड्यूसर आर्गनाइजेशन (एफपीओ) बनाया। इसमें 400 किसान शामिल थे। धीरे-धीरे दायरा बढ़ता गया। अब कंपनी में जिले के कई उन्नतिशील किसान जुड़े हैं। सभी जैविक खेती के साथ-साथ खेतीबाड़ी में प्रयोगधर्मी हैं। दो तरह से खेती करते हैं। एक सीड प्रोग्राम और दूसरा वेयरहाउस तरीके से। सीड प्रोग्राम के तहत कंपनियां सिर्फ बीज के लिए आलू लेती हैं , जिसका आकार छोटा और मध्यम होता है। वेयरहाउस फार्मिंग में आलू को बड़ा होने तक खोदाई नहीं की जाती है। यह चिप्स बनाने के लिए होता है। पेप्सिको औसतन 13 रुपये प्रति किलो आलू खरीदती है तो मकैन 10 रुपये प्रति किलो में लेती है। आलू की पैदावार प्रति एकड़ 100 क्विंटल हो जाती है।
इंटीग्रेटेड पैक हाउस में फल-सब्जियां
गुरदयाल सिंह के मुताबिक उनका इंटीग्रेटेड पैक हाउस फरवरी 2022 तक बनकर तैयार हो जाएगा। यह एक कोल्ड स्टोर की तरह होगा , जिसमें फल और सब्जियां लगाई जाएंगी। फलों में तरबूज , खरबूजा और अमरूद होगा। बता दें कि कैथल में गुहला और सीवन सबसे बड़े सब्जी उत्पादक खंड हैं। गुरदयाल सिंह सीवन क्षेत्र में यह पैक हाउस लगा रहे हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डा. कर्म चंद का कहना है कि अन्य किसानों को भी गुरदयाल सिंह से प्रेरणा लेनी चाहिए।
सरकार भी देती है अनुदान
कैथल के जिला बागवानी अधिकारी प्रमोद सहारण का कहना है कि उन्नतिशील किसान फार्मर प्रोड्यूसर आर्गनाइजेशन (एफपीओ) बनाकर फल-सब्जियों को बेहतर तरीके से बेच सकते हैं। नुकसान का जोखिम कम होगा। सरकार ऐसे प्रोजेक्ट पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान करती है। पेप्सिको कंपनी में एग्रोनामिस्ट सतीश कुमार ने कहा कि किसान अगर जागरूक हों तो उन्हें पता चल सकता है कि कहां पर फसल बेचनी है। हम किसानों से सीधे अनुबंध करते हैैं।
Source News: jagran
