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Home » बेहद चौंकाने वाले हैं आंकड़े, कोरोना और लॉकडाउन ने छीन ली लोगों की नींद और चैन

बेहद चौंकाने वाले हैं आंकड़े, कोरोना और लॉकडाउन ने छीन ली लोगों की नींद और चैन

faridabadnews24By faridabadnews24March 27, 2022No Comments6 Mins Read
image Source : google

भारत मे कोरोना वायरस (Coronavirus in India) की वजह से साल 2020 में लगे डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट को संक्रमण के मामलों में कमी की वजह से केंद्र सरकार ने 31 मार्च के बाद हटाने का फैसला किया है. यानी 2 साल बाद 31 मार्च से भारत मे कोरोना की वजह से लगाई गईं लगभग सभी कड़ी पाबंदियों को केंद्र सरकार ने हटाने का फैसला किया है. इसके बाद सिर्फ सार्वजनिक स्थानों पर मास्क और सामाजिक दूरी के नियम जारी रहेंगे.

कोरोना और लॉकडाउन ने छीन ली नींद और चैन

कोरोना और उससे लगी पाबंदियों ने बीते 2 सालों में भारत समेत पूरे विश्व को बुरी तरह प्रभवित भी किया. कई देशों की जीडीपी तो कोरोना की वजह से ध्वस्त हुई ही कोरोना और पाबंदियों ने लोगों की नींद, चैन सब छीन लिया. इतना ही नहीं कोरोना से लगीं पाबंदियों ने लोगों को अहसास कराया कि वो अकेले हैं और चार दीवारी में बंद हैं. कोरोना महामारी और उसकी वजह से लगीं पाबंदियों ने लोगों को मोबाइल फोन का आदी बना दिया और स्क्रीन टाइम ने लोगों की नींद या तो कम कर दी या फिर नींद का समय खराब कर दिया है.

सर्वे में हुए चौंकाने वाले खुलासे

ब्रिटिश मार्केटिंग फर्म आईपॉस और लंदन स्थित किंग्स कॉलेज द्वारा ब्रिटेन में करवाए गए सर्वे में 31% लोगों ने शिकायत की कोविड और पाबंदियों की वजह से वो पहले से ज्यादा अकेलेपन का शिकार हो चुके हैं. सर्वे में अकेलेपन की शिकायत करने वाले लोगों में 57% लोगों ने बताया कि इस अकेलेपन की वजह से वो अवसाद यानी डिप्रेशन (Depression) से पीड़ित हो गए हैं. आइपोस और किंग्स कॉलेज के सर्वे में एक और बड़ी बात सामने निकल आई है.

 

नींद को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े

– 31% लोगों में अकेलेपन की शिकायत.
– 57% हो गए हैं अकेलेपन से पीड़ित.
– 50% लोगों ने की स्क्रीन टाइम बढ़ने की शिकायत.
– 58% लोगों ने की समय पर नींद ना आने की शिकायत
– 59% भारतीय 11 बजे के बाद सोते हैं.
– 36% की नींद पर गलत प्रभाव डिजिटल मीडिया ने डाला है.
– 80% युवाओं को जागने के बाद फ्रेश महसूस नहीं होता.
– 25% युवाओं को नींद नहीं आती है.

डॉक्टरों के पास आने वाले ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी

कोविड संक्रमण और उससे लगने वाली पाबंदियों के बाद से डॉक्टरों के पास आने वाले ऐसे मरीजों की संख्या में खासा उछाल हुआ है जो या तो अकेलेपन की वजह से डिप्रेशन से प्रभावित हो गए हैं या फिर मोबाइल की वजह से नींद समय पर नही आ रही है. ऐसे लोगों को अकेलापन दूर करने के लिए मोबाइल चलाने की जगह बाहर सैर करने निकल जाना चाहिए, जिससे शरीर भी स्वस्थ होगा और अकेलापन भी दूर होगा. डॉक्टरों के मुताबिक सही समय पर नींद ना लेना भी व्यक्ति के डिप्रेसन से पीड़ित होने का एक अहम कारण है.

कोविड की वजह से स्क्रीन टाइम बढ़ा

सर्वे में शामिल हर दो में से 1 व्यक्ति यानी 50 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कोविड की वजह से उनका स्क्रीन टाइम बढ़ गया है. स्क्रीन टाइम बढ़ने की एक बड़ी वजह लोगों का अकेलापन और घर से ऑफिस का काम है, क्योंकि पाबंदियों और कोरोना की वजह से लोग अपनो से मिल नही पा रहे हैं और उनके साथ समय नही बिता पा रहे हैं. इस वजह से मोबाइल फोन या टीवी का सहारा लेकर अकेलापन दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं वर्क फ्रॉम होम की वजह से काम बढ़ गया है, जिस कारण मोबाइल और कंप्यूटर पर उन्हें ज्यादा समय व्यतीत करना पड़ रहा है.

स्क्रीन टाइम बढ़ने से नींद पर बुरा असर

बढ़े हुए स्क्रीन टाइम ने लोगों की नींद पर भी बुरा असर डाला है. 58 प्रतिशत लोगों के मुताबिक कोविड के बाद से उन्हें ठीक से नींद नही आती है. नींद पर भारत में भी वेकफिट कंपनी द्वारा करवाए गए सर्वे में 59 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वो रात 11 बजे के बाद सोते हैं. वहीं 36 प्रतिशत लोगों के मुताबिक उनकी नींद के समय पर गलत असर डिजिटल मीडिया ने डाला है. 80 प्रतिशत भारतीय युवाओं ने सर्वे में कहा कि उन्हें नींद से जागने के बाद फ्रेश नहीं महसूस होता है और 25 फीसदी यानी हर 4 में से 1 भारतीय युवा ने नींद ना आने की भी शिकायत की है.

नींद कैसी और कब ली जाए यह सबसे जरूरी

इंसान के शरीर मे मिलेनोटोनिन नाम का हार्मोन एक बार रात 11 बजे प्रोड्यूस होता है और फिर रात 3 बजे. अगर इन दोनों समय व्यक्ति सो नहीं रहा है तो पूरा दिन उसके शरीर मे हार्मोनल चेंजेस बने रहते हैं, जिस कारण व्यक्ति अवसाद यानी डीप्रेशन से भी ग्रसित हो जाता है और पूरा दिन फ्रेस महसूस भी नहीं करता है. इसलिए नींद कितनी ली जाए यह जरूरी नहीं है. नींद कैसी और कब ली जाए यह जरूरी है.

डॉक्टरों का मानना है कि सोने और जागने का अपना एक समय होता है. उसके साथ छेड़छाड़ व्यक्ति को बीमारियों का घर बना देती है. ऐसे में क्वालिटी नींद लेने के लिए लोगों को 11 बजे से पहले ही सो जाना चाहिए. रही बाद कितने घंटे की नींद तो यह उम्र पर निर्भर करता है. बच्चों के लिए 10 घंटे, वयस्कों के लिए 8 घंटे और बुज़ुर्गो के लिए 6 घंटे की नींद काफी है. लेकिन यह काफी तभी होगी जब सही समय यानी रात 11 बजे से पहले अगर व्यक्ति सो जाए.

अकेलापन या फिर नींद की समस्या से जूझ रहे लोगों को सुझाव

अगर आपको भी अकेलापन की समस्या है या फिर नींद की समस्या है तो हम आपको कुछ जरूरी टिप्स देना चाहते हैं, जिसको फॉलो कर आप अच्छा महसूस कर सकते हैं.

1. अकेलापन महसूस होने पर अपने माता-पिता या फिर जो व्यक्ति आपको सबसे ज्यादा प्रेम करता है उसे कॉल करके बात कर लीजिए. अगर घर कुछ घंटो की दूरी पर है तो उनसे मिल आएं.

2. अगर घर के बगल में कोई पार्क है तो वहां थोड़ा सा घूम लीजिए या फिर सड़क पर थोड़ा सा टहल सकते हैं.

3. अगर आपको रात में नींद ना आने की समस्या है तो शाम को 5 बजे के बाद चाय या कॉफी का सेवन ना करें.

4. सोने के कमरे में मोबाइल या किसी भी प्रकार का गैजेट ना रखें जो आपकी नींद में खलल डाले.

5. स्वस्थ नींद के लिए नींद के घंटों की जगह समय पर सोने की कोशिश करें. यानी रात 11 बजे से पहले किसी भी हाल में सो जाएं

 

source news: zeenews.

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