परफेक्ट हाइड्रोलिक इंडस्ट्रीज के मालिक राकेश तिवारी ने दिया अग्नीपथ पर बड़ा बयान

केंद्र सरकार की इस योजना के चलते सेना में स्थाई भर्ती की जगह संविदा के तौर पर भर्ती होगी, जोकि बच्चों भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जिससे सालों से सेना में भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं के साथ धोखा होगा । इस योजना से न सिर्फ युवाओं को नुकसान होगा,बल्कि सेना की गोपनीयता एवं विश्वसनीयता भी भंग हो सकती है। केंद्र सरकार को इस योजना को बंद कर पहले की तरह भर्ती प्रक्रिया को शुरू करना चाहिए। कुछ लोगों का मानना है कि सरकार ने यह कदम वेतन और पेंशन का बजट कम करने के लिए उठाया है। गौरतलब है कि प्रदर्शनकारियों में अधिकांश युवा वह हैं जो सेना में भर्ती होने के लिए काफी पहले से तैयारी में जुटे थे।

 

 

नई भर्ती प्रक्रिया से उनका धैर्य टूट गया। बिहार में Agneepath Scheme का विरोध कर रहे युवाओं को कई बातों की चिंता है। उनका कहना है कि वे सेना में जाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं। इसके बाद भी अगर चार साल की नौकरी ही मिले तो इसका क्‍या फायदा। सरकार हमें ऐसे रास्‍ते पर छोड़ देगी, जहां से हमें कोई रास्‍ता नहीं मिलेगा। इसलिए सरकार पुरानी प्रणाली ही कायम रखे। इस तरह का अग्निवीर हमें नहीं बनना।

 

 

प्रदर्शनकारी युवाओं का ये भी कहना है कि सरकार केवल चार साल की नौकरी देगी। न तो पेंशन का लाभ मिलेगा न ग्रैच्‍युटी का। चार साल के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही नौकरी दी जाएगी, शेष 75 प्रतिशत को अनिवार्य रूप से रिटायर कर दिया जाएगा। ऐसे में जो अग्निवीर 17 साल की उम्र में नौकरी में आएंगे, वे 21 साल की उम्र में बेरोजगार हो जाएंगे। उनके पास न तो प्रोफेशनल डिग्री होगी, न विशेष योग्‍यता। ऐसे में वे दर-दर की ठोकरें खाएंगे। युवाओं का कहना है कि शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) में भी 10 से 12 साल की नौकरी होती है। फिर सरकार यह कौन-सी व्‍यवस्‍था कर रही है। उत्तराखंड के बागेश्वर में अग्निपथ योजना पर युवा वर्ग ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ मंजूर नहीं है। उन्हें चार वर्ष की सेवा नहीं करनी है

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