
दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति को हटाकर पुरानी आबकारी नीति शुरू कर दी हैं, एक सितंबर से पुरानी आबकारी नीति के तहत ही सरकारी दुकानों का संचालन किया जा रहा है। अब करीब 500 सरकारी दुकानों को लाईसेंस दिए गए हैं, माना जा रहा है कि इस महीन के आखिर तक 500 से बढ़ाकर 700 कर दी जाएगी, यानी 200 दुकानों को लाईसेंस दिए जा सकते हैं। दिल्ली में इस समय सिर्फ 350 दुकानों पर ही शराब की बिक्री हो रही है। आबकारी विभाग के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक अब नई की जगह पुरानी आबकारी नीति के तहत ही लाईसेंसी सरकारी दुकानों के जरिए शराब की बिक्री जा रही है। बताया जा रहा है कि प्राईवेट दुकानों को बंद कर अब सिर्फ सरकारी दुकानों पर ही शराब मिल रही हैं।
कुछ समय पहले बड़ी संख्या में प्राईवेट दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दी थीं,अब जब यह नीति वापस ले ली गई हैं तो अब सरकारी दुकानें ही चल रही हैं। इन सभी सरकारी दुकानों को दिल्ली सरकार के चार पीएसयू यानी डीएसआईआईडीसी, डीटीटीडीसी, डीसीसीडब्ल्यूएस और डीएससीएससी के लाईसेंस दिए गए हैं। एक सितंबर से अब करीब 450 दुकानों पर शराब की बिक्री हो रही है। माना जा रहा है कि प्राईवेट वेंडर होने से सरकार को रेवेन्यू नहीं मिलता, लेकिन अब इन लाईसेंसी सरकारी दुकानों से होने वाली शराब की खुदरा बिक्री से चारों पीएसयू को 15 फीसदी रेवेन्यू सीधे तौर पर मिलेगा, यह सीधा सरकारी खजाने में जाएगा।
अवैध शराब पर अंकुश लगाने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा हैं कि दिल्ली में शराब की किल्लत नहीं हो, और इसकी ब्लेकमार्केटिंग भी नहीं हो, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अवैध शराब की आपूर्ति की किसी प्रकार की संभावना को रोकने के लिए भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। लोगों को अच्छी क्वालिटी की शराब मुहैया कराने पर भी पूरा बल दिया जा रहा है।
NEWS SOURCE : punjabkesari
