फरीदाबाद : राजिन्दर सिंह जी महाराज हम सबके लिए वर्तमान समय मुश्किलों और तनाव से भरा हुआ है l अत्यधिक डर और चिंता का वितरण हमारी भावनाओ पर हावी होता जा रहा है l दुनियाभर मैं लोगों का जीवन पूरी तरह ठहर -सा गया है lहर इंसान यह सोचकर चिंतित है कि आने वाले दिनों मैं क्या होगा l लोग अपने स्वास्थय और अपने प्रियजनों के स्वास्थय को लेकर काफी घबराए हुए है l इन हालात मैं हम तमाम तरह से भय से स्वयं को कैसे मुक्त रखें ? आईये! पहले समझें कि हम डरते क्यों हैं ? डर या तो संदेह के कारण पैदा होता है या किसी अज्ञात आशंका से l हमारी यह चिंता कि अगले पल क्या होगा, डर को हमारे अंदर लाती है l जब हमें स्वयं पर संदेह होता है तो हमें डर होता है कि हमसे कि कहिं हमसे कोई ग़लती न हो जाय या हम कोई गलत निर्णय न ले लें l
जब हमें संदेह होता हैं कि हमारे प्रयास यदि हमारे अनुकूल न हुए तो क्या असर होगा l जब हम संसार को चलाने वाली ताकत के असिस्त्व पर संदेह करने लगते हैं तो हमें किसी न किसी दुर्घटना का डर बना रहता है l हम डरते हैं कि हम कमजोर हैं l बच्चे बच्चियां स्कूल के मैदान मैं सताए जाने से डरते हैं l रोजाना स्कूल से वापिस लौटते समय , कमजोर बच्चे को , बड़े बच्चों से पिटने का डर सताता है l कार्यस्थल पर कमजोरी अपने मालिक से डरते है l उसकी तनख्वाह और नौकरी , दोनों मालिक के हाथ होते हैं l हमें लगता है कि कार्यस्थल पर हो रहे अन्याय का विरोध करने के लिए हम बहुत दुर्बल और अशक्त हैं क्योंकि जिनके पास ताकत है वे पलटकर हमें ही दंडित करेंगे I वास्विकता की अपेक्षा हमें यह सोच भयभीत करती है कि आगे क्या होगा l
जिन्हे मौत से डर लगता है , वास्तव मै वे किसी से डरते है l लोग अज्ञात से डरते है क्यूंकि यह दर्दनाक या दुखदायी हो सकता है l वे नहीं जानते कि भविष्य के गर्भ मैं क्या है , इसलिए चिंता और डर अपनी पैठ बनाने लगते हैं l जीवन मैं निर्भयता कैसे लाएं ? हमारी आत्मा , जो पूर्णतया चैतन्य l परम पिता परमात्मा की अंश होने के कारण निर्भय है l चूंकि प्रभु चेतनता के महासागर है और आत्मा उनसे एकरूप है, इसलिए यह परमात्मा का ही लघु रूप है lप्रभु भय से रहित है और इसलिए आत्मा भी निर्भय है l जब हम अपनी आत्मा के संपर्क नहीं रहते तो डर से घिर जाते हैं l आत्मा सत्य है और चेतन स्वरुप है l
पूर्ण सत्य के साथ जुड़े रहने का अर्थ है कि किसी भी तरह के डर का न रहना lआत्मा के लिए डर जैसी कोई चीज नहीं l ज्ञान एवं विवेक आत्मा का गुण है इसलिए यह दिव्य-ज्ञान पाने में समर्थ है l आत्मा से कुछ भी छुपा नहीं रह सकता l उससे किस बात का डर है ? अपनी आत्मा के संपर्क मैं रहने वाले लोगों – सूफी , संत -महापुरुष , पैगम्बर और सभी जाग्रत आत्माओं – ने इसको अनुभव किया है l अंसवेदी बनना चिकित्सा के छेत्र मैं अंसवेदी बनने का अर्थ है कि किसी व्यक्ति को ऐसे द्रव्य की छोटी -छोटी खुराक देना जिससे उसे एलर्जी है l इस तरह छोटी-छोटी खुराक देने से , उसमें उस द्रव्य के प्रति प्रतिरोधक छमता विकिसित हो जाती है और उसका शरीर उस पदार्थ की ज्यादा मात्रा का मुकाबला करने में सक्षम हो जाता है l इसी तरह यदि हम अपनी छोटी -छोटी समस्याओं के दौरान निर्भय रहने का अभ्यास करें तो हम जीवन मैं आने वाली बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना करने मैं समर्थ जो सकते हैं l इस निर्भयता का अभ्यास तभी कर पाएंगे जब हम अपनी शक्तिशाली आत्मा से जुड़ेंगे सामर्थ्यवान आत्मा और उसकी निर्भयता का अनुभव कैसे करें ? हमें यह समझना होगा कि वास्तव मैं शक्ति से भरपूर हमारी आत्मा ही सभी चुनौतियों का सामना करती है l
यदि हम आत्मा की शक्ति से जुड़े पाएं तो हर तरह से डर से जीत सकते हैं और हम एक स्थाई शान्ति और सुरक्षा के घेरे में रहने लगते हैं l हमारी आत्म -शक्ति , पिता -परमेश्वर से एकमेक होने के कारण सदा हमारे साथ होती है और जीवन की चुनौतियों मैं हमारी मददगार बनती है l जरुरत केवल इस बात की है कि हम खामोशी से बैठें और आत्मा की शक्ति का अनुभव करें l ध्यान -अभ्यास एक ऐसी तकनीक है जिसमे हम अपने ध्यान को बाहरी दुनिया से हटाकर अन्तमुर्ख एकाग्र करते हैं l ऐसा करते समय हम अपना ध्यान बाहर की हलचल से हटाकर, अपनी आत्मा की और करते हैं जो कि परमात्मा की अंश है और अन्नत प्रेम और ख़ुशी का भण्डार है l वर्तमान समय मैं हम क्या कर सकते हैं ? अपने जीवन मैं आने वाली चुनौतियां को हम ख़त्म नहीं कर सकते l
बाहरी दुनिया की घटनाओ पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है lहम पूर्ण विश्वास से नही कह सकते कि हमारी नौकरी , हमारा घर , धन दौलत और हमारे नजदीकी हमसे नजदीकी हमसे कभी नहीं छूटेंगे l हम इतना कर सकते है कि निडरतापूर्वक इन चुनितियों का सामना करें ताकि ये दुःख -दर्द और चिंताए हमें पंगु न बना सकें l हम समझकर पढ़ने , देखने ,और सुनने से और सोशल मीडिया से खुद को दूर करें और अपना समय ध्यान-अभ्यास करने और अपनी आत्म -शक्ति का अनुभव करने मैं लगाएँ l जब एक बार हमें अपनी दिव्विता का अहसाह हो जाए और हम अपनी आत्म-शक्ति को पहचान लें तो हमारा जीवन प्रेम ,खुशी, निर्भयता और आस्था से भर उठता है l
