संत सैनिक किसान परेशान भारत देश महान : महंत कैलाश नाथ हठयोगी

फरीदाबाद : अखिल भारतीय संत एकता आंदोलन परिषद एवं गुरु गोरक्षनाथ मानव कल्याण संस्थान कपूरथला पंजाब तथा सर्वधर्म सद्भाव विश्रांति मिशन के परमाध्यक्ष महंत कैलाश नाथ हठयोगी ने एक बयान जारी कर कहा कि वर्तमान समय की घटना संतों की हत्या पालघर होशियारपुर बुलंदशहर उत्तर प्रदेश में हुई है उसकी घोर निंदा करते हुए कहा है कि इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कठोरतम सजा मिलनी चाहिए समाज और सरकार इन घटनाओं के बारे में विचार करें के घटनाक्रम के पीछे किन लोगों का हाथ है

 

और क्या मानसिकता है सबसे अधिक सन्त-सैनिक- किसान अपने साथ हो रहे सौतेले व्यवहार से परेशान एवं दुखी हैं संत हत्या अपमान और सौतेले व्यवहार के कारण सैनिक अपने साथ हो रहे महंगाई भत्ते की किस्त (D.A)कटने के कारण जिसके लिए एक सैनिक को माननीय उच्चतम न्यायालय जाना पड़ा एवं किसान फसल का सही मूल्य न मिलने के कारण एवं आढ़तियों मंडियो में पढ़े सड़ रहे गेहू ओर समय पर बिक्री न होने के कारण, इन घटनाओं ने सिद्ध कर दिया कि इस देश में सबसे ज्यादा कोई असुरक्षित है तो संत सैनिक किसान हैं इस प्रकार की घटना होती है उसे तिल का ताड़ बना कर राजनीति शुरू हो जाती है अंततः परिणाम ज्यो का त्यों रह जाता है, सीमाओं पर सैनिक नित्य प्रति मारे जाते हैं खेतों में सड़कों पर किसान मर रहा है फसल खराब हो रही है

 

वर्षा के कारण फसल खेतों में खलिहान में मंडियों में नीचे धरती ऊपर आसमान में पड़े होने के कारण भीग कर खराब हो जाता है सड़ जाता है अन्न के दाम सरकार के कुछ व्यापारियों दलालों के माध्यम से तय होता है 25 परसेंट ही मूल्य किसान को मिल पाता है धरती पर जब तक परेशान किसान तब तक भूखा इंसान रहेगा, इस प्रकार से संत सैनिक किसान तीनों ही परेशान है इनके नाम पर राजनीति जरूर हो रही है लेकिन वास्तव में इनकी चिंता किसी को नहीं है सरकार ने वेतन भोगियों पेंशन धारियों की महंगाई भत्ते के कटौती की घोषणा तो कर दी लेकिन महंगाई कम करने की घोषणा क्यों नहीं की? सरकार के इस रवैया से संपूर्ण देश के कर्मचारी वेतन भोगी पेंशनभोगी लोग परेशान एवं चिंतित हैं सरकार का यह निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है

 

करोना महामारी लोग बंदी के कारण लोग मानसिक रूप से परेशान एवं तनाव ग्रस्त हैं उसी दौरान सरकार के इस फरमान से लोग दुखी हैंकिसान का बेटा ही सैनिक-संत एवम कारखानों में मजदूर हैसरकार को अपना यह निर्णय तत्काल वापस लेना चाहिए देश समाज को हमारे शासक प्रयोगशाला ना बनाएं रोजाना नए नए प्रयोग ठीक नहीं होते हैं

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