कोरोनावायरस के खौफ और डर के बीच में, मई से शराब की दुकान खोलने का आदेश दे दिया गया। यह बात ध्यान में रखते हुए की, राज्य सरकारों के पास राजकोष में जमा पैसा धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। इस समय सरकार को टैक्स के पैसे की बहुत ही अधिक आवश्यकता है। जिसके कारण वह कोरोनावायरस के कहर के बीच में भी, शराब की दुकानों को खोलने के लिए तैयार हैं। जैसे हमें सब से अधिक जरूरत इस समय इसकी ही थीं।
जब हम अपने सभी कार्य बंद कर के, इस इंतजार में बैठे हैं। कि कोरोनावायरस कम से कम फैले। वहां हमारी सरकार शराब की दुकानों को खोलने के आदेश दे रहीं है। केवल अपने राजकोष में वृद्धि करने के लिए।
भारत में कोरोनावायरस के कारण लगे, लॉक डाउन में सभी प्रकार के कार्य बंद कर लिए गए। जिसके चलते सरकार को मिलने वाले टैक्स के पैसे में कमी आ गई। किंतु क्रोना वायरस के कारण सरकार के खर्चे दिन प्रतिदिन बढ़ते ही चले गए। लॉक डाउन की समाप्ति होने से पहले ही सरकार को अपने राज कोष को उसको खाली होने से बचाने के लिए चिंता सताने लगी। जिसके लिए प्रत्येक राज्य की सरकार ने यह निर्णय लिया कि वह शराब की दुकानें खोल देंगे।
जहां हमारे देश में हमारी सभी आवश्यक वस्तु पर रोक लगा दी गई है। वहीं हमें शराब पीने की छूट प्रदान कर दी गई है। हमें काम पर जाने की इजाजत नहीं है, किन्तु शराब की दुकानों पर जाकर शराब लेने की इजाजत मिल चुकी है।
हमारे देश की सरकारों को भी पता है। जिस देश की जनता के पास है खाने के लिए खाने की कमी है। वही जनता शराब के इस तरह दीवानगी रखती है। कि कहीं ना कहीं से शराब पीने के लिए पैसों का इंतजाम कर ही लेगी। लोन की किस्तों को चुकाने के लिए, सरकार का मुंह ताकती हमारी जनता, शराब की बोतलों का इंतजाम करने में अपनी समझदारी और होशियारी दोनों का प्रदर्शन करती नजर आ रही है।
शराब की दुकानों पर लगने वाली भीड़ यह बताती है। कि हमारे देश में लोगों को ना कोरोना वायरस का कोई डर है और ना ही सरकार को शराब के कारण अपराधों में होने वाली बढ़त की को फिक्र है।
भारत में सड़क दुर्घटना एक बहुत ही बड़ी समस्या है। भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में 70% ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं। जिनमें अपराधी नशे में चूर पाया जाता है। इसके बावजूद भी हमारे देश में शराब और अन्य नशों पर रोक लगने के स्थान पर उनको बढ़ाने की कोशिश हमारी सरकारों द्वारा की जा रही है। जिसका एक उदाहरण आज हम सभी लॉक डाउन के समय में भी शराब की दुकान खोलने का निर्णय लेने की हमारी सरकारों द्वारा की गई पहल से समझ सकते हैं।
शराब के कारण हमारे देश में प्रत्येक 96 मिनट में एक व्यक्ति की मौत होती है। लेकिन यह हमारी सरकारों के लिए कोई चिंता का विषय नहीं है। हमारे देश में क्रोना वायरस से अधिक मौतें शराब के कारण होने पर भी यह हमारी देश की सरकार के लिए चिंता का विषय ना हो कर अपनी टैक्स में बढ़त करने का विषय है। जिसके लिए वह कितनी भी भारतीयों की बलि चढ़ाने से पीछे नहीं हटने को तैयार हैं। यदि क्रोना वायरस की तरह शराब भी एक संक्रमण होती, तब हमारी सरकार इस तरीके के फैसले कभी ना कर पाती।
भारत में अधिकतर स्त्रियों के साथ होने वाले घरेलू हिंसा के मामलों में पति द्वारा शराब पीकर पत्नी को मारने की घटनाएं आम सी बात है। किंतु यह सब अपराध और आंकड़े केवल हमारे जाने के लिए है। हमारी सरकार द्वारा इन आंकड़ों पर कार्य करने की कोई भी नियत हो, ऐसा हमें नजर नहीं आता है। हमारी सरकार अपनी लाभ और अपने राजकोष को बढ़ाने के लिए इस तरह चिंतित है कि वह इन सभी आंकड़ों के बाबजूद भी शराब को बंद नहीं कर सकतीं है। जैसे हमारी सम्पूर्ण अर्थ व्यवस्था एक शराब की बोतल पर ही खड़ी हो।
