
चंडीगढ़: अन्य राज्यों से कहीं अधिक नई ताजगी, उमंग और ऊर्जा के साथ शुरू होगा हरियाणा के लिए वर्ष 2024नववर्ष 2024 एक नई ताजगी- नई उमंग और नई ऊर्जा के साथ शुरू हो रहा है। पूरी दुनिया नव वर्ष के इस त्यौहार पर अपने नजदीकी लोगों- रिश्तेदारों को खुशियों भरे संदेश दे रहे हैं। इसी तरह देशभर में राजनीतिक दलों द्वारा एक नए मिशन को फतह करने के लिए लंगोटी कस ली गई है। कारण है 2024 में पूरे देश में होने वाले लोकसभा चुनाव। लेकिन हरियाणा में यह उत्साह और जोश अन्य प्रदेशों से कहीं ज्यादा दिखेगा। क्योंकि यहां भविष्य में न केवल लोकसभा बल्कि विधानसभा और निकाय चुनाव भी होने हैं। राजनीतिक दल हालांकि काफी लंबे समय से इस मिशन को साधने की कोशिशें लगातार करते नजर आ रहे हैं, लेकिन अब नए वर्ष की शुरुआत के साथ ही चुनाव की नजदीकियां ज्यादा नजदीक नजर आने लग जाएंगी। हरियाणा में खासतौर पर सत्ताधारी दल भाजपा, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, सरकार में सहयोगी जननायक जनता पार्टी और कई बार सत्ता में रही इनेलो पार्टी अपनी ताकतवर उपस्थिति दर्ज करवाने की कोशिश में रहेंगे।
वर्ष 2024 में बेरोजगारी के मुद्दे को भी समाप्त करेगी भाजपा
बीते वर्ष 2023 में अगर बात करें मौजूद सत्ताधारी दल भाजपा की तो इसमें कोई दो राय नहीं कि पिछले तीन-चार महीने में प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा की गई बैटिंग से सभी अन्य दल बेहद हैरान और असमंजस में हैं। क्योंकि मुख्यमंत्री द्वारा लगातार प्रदेश वासियों के लिए लाई गई जनकल्याणकारी योजनाएं तथा कर्मचारियों के हितों में लिए गए लगातार फैंसलों से प्रदेश की हवा एकदम से बदल गई है जो लोग प्रदेश में यह दावा करते नजर आ रहे थे कि भाजपा का सफाया निश्चित है, वही लोग अब भाजपा की जीत की बात कहते नजर आने लगे हैं। जिस प्रकार से लापरवाह अधिकारियों पर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने नकेल कसी है, जिस प्रकार से जन संवाद के कार्यक्रमों में फैसले लिए हैं और जिस प्रकार से पड़ोसी राज्यों के नतीजे भाजपा के पक्ष में आए हैं
प्रदेश की जनता भाजपा के गुणगान करती नजर आने लगी है यानि अगर आज की बात करें तो चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में नजर आ रहे हैं और वर्ष 2024 में भारतीय जनता पार्टी की मनोहर सरकार ने जिस प्रकार से किलेबंदी की तैयारी की है, यह विरोधी दलों के लिए एक बड़ी परेशानी वाली बात साबित होनी मानी जा सकती है। लगातार रोजगार को लेकर सरकार को घेरने वाली पार्टियों का यह मुद्दा भी खत्म होने के बेहद नजदीक माना जा सकता है और अब प्रदेश के भाजपा विधायक जिस प्रकार से अपने विधानसभा क्षेत्र के हर वार्ड- कॉलोनी- गांव में संबंधित अधिकारियों को बुलाकर जिस प्रकार से लोगों की परेशानियां- दिक्कतें मौके पर ही दूर करने तथा लोगों के विकास के कार्यों को मौके पर ही अमली जामा पहना रहे है उससे यह तय है कि जनता मौजूदा सरकार के प्रति प्रभावित हो सकती है।
हुड्डा के लिए अपने ही नेता 2023 में बने रहे चुनौती
वहीं अगर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की बात करें तो नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा 2023 में भी अपनी पार्टी के प्रदेश में सबसे बड़े – ताकतवर और विश्वसनीय नेता बने नजर आए हैं और 2024 में भी उनके ऐसे ही प्रयास हैं। 2023 में हुड्डा की सबसे बड़ी जीत अपने गुट के नेता उदयभान को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बिठाना मानी जा सकती है यानि आज कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से प्रदेश में उनके कंट्रोल में है। वहीं दूसरी तरफ किरण- शैलजा और सुरजेवाला भी पार्टी में अपनी ताकत को मजबूत करने की बेशक कोशिशें में नजर आते रहे हैं, लेकिन हुड्डा की कमांड शीर्ष नेतृत्व की नजर में आज भी बहुत मजबूत नजर आ रही है। जिस प्रकार से भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इन तीन बड़े ताकतवर नेताओं के क्षेत्र में विशाल रैली कामयाब की उससे इनकी लोकप्रियता में ओर अधिक इजाफा हुआ है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए आज बड़ी चुनौती केवल बीजेपी नहीं बल्कि अपने ही दल में कई बड़े नेता हैं। जिनसे लड़ाई हुड्डा को लड़नी पड़ रही है।
प्रदेशवासी और खास तौर पर पार्टी के कार्यकर्ता इस बात को लेकर असमंजस में है कि कांग्रेस पार्टी किसके सिर पर सेहरा बांधेगी। इस कारण से कांग्रेस पार्टी की तैयारी मौजूदा सत्ताधारी दल से कहीं कमजोर बेशक नजर आ रही हैं लेकिन भूपेंद्र सिंह हुड्डा आने वाले समय में अपने राजनीतिक रथ की रेस का पंजा अवश्य दबाएंगे यानि अगर बात करें तो प्रदेश में भाजपा पार्टी के लिए अगर कोई दल चुनौती बन सकता तो वह कांग्रेस है। क्योंकि पिछले चुनाव परिणाम पर नजर डाली जाए तो हुड्डा की कूटनीति के कारण ही भाजपा का 75 पार का नारा धराशाही हुआ था और कुछ ही विधायकों का अंतर रहा था। इस कारण ही अगले विधानसभा चुनावों में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में जोश और उत्साह की कमी नहीं नजर आएगी।
राजस्थान सरकार बनाने में भी भाजपा की मददगार साबित हुई है जजपा
वहीं प्रदेश में तीसरा राजनीतिक दल है जननायक जनता पार्टी जो मौजूदा सरकार में साझेदारी भी है। इस पार्टी की कमान पूरी तरह से अगर कहें कि उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के हाथ में है तो गलत नहीं होगा। वही संगठनात्मक रूप से दुष्यंत के अनुज दिग्विजय पूरी तरह से सिस्टम को संभाले हुए हैं। हाल ही में राजस्थान के विधानसभा चुनाव में जिस प्रकार से इस पार्टी ने अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई, बेशक कोई सीट जीतने में कामयाब नहीं हुई लेकिन यह माना जा रहा है कि जाट बाहुल्य कई सीटों पर भाजपा की जीत में जेजेपी एक मुख्य सहयोगी साबित होने वाली पार्टी रही है। जिसकी रूपरेखा पूरी तरह से दिग्विजय के हाथ में थी।
राम लक्ष्मण जैसी इस जोड़ी ने भाजपा सरकार बनाने के लिए न केवल 2019 के विधानसभा चुनावों के परिणाम के बाद एक बड़ी भूमिका निभाई है, वहीं राजस्थान में सरकार बनाने में भी भाजपा की बड़ी सहयोगी रही है। आने वाले समय में यह बात देखने को रहेगी कि जेजेपी का कितना सहयोग भाजपा लेगी या जजपा भाजपा के साथ गठबंधन करेगी लेकिन अब तक इन दोनों दलों का गठबंधन विपक्षियों के लिए एक कड़ी और बड़ी चुनौती साबित हुआ है। वहीं 2023 में इनेलो पार्टी के विधायक अभय सिंह चौटाला अपनी स्पष्ट भाषाशैली और मजबूत स्टैंड लेने वाले अपनी पहचान बनाए रखे नजर आए हैं। विधानसभा में जिस प्रकार से वह एकमात्र विधायक होने के बावजूद सरकार पर गरजे और बरसे हैं यह बात हमेशा सुर्खियों में रही है। उनके कार्यकर्ता उनकी इसी अदा के मुरीद हमेशा रहे हैं। आने वाले समय में चुनावी परिस्थितियों जिस प्रकार से बन रही हैं तो इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि स्पष्ट बहुमत की सरकार न बनी तो किंगमेकर की पगड़ी किसी के भी सर बंध सकती है।
NEWS SOURCE : punjabkesari
