
फरीदाबाद: स्मार्ट सिटी में अब डीजल से जेनरेटर चलाने वालों कार्रवाई होगी। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने तैयारी शुरू कर दी है। डीजल से चलने वाले जेनरेटर की पहचान के लिए तीन टीमें गठित की गई है। पकड़े जाने पर संचालक के खिलाफ जुर्माना का भी प्रावधान किया गया है। इससे शहर स्थित सोसाइटी और उद्यमियों की चिंता बढ़ गई है। गौरतलब है कि स्मार्ट सिटी फरीदाबाद को औद्योगिक नगरी के रूप में भी जाना जाता है। करीब 26 लाख आबादी वाले शहर में 25 हजार के आसपास छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां है।
इनमें से अधिकांश ऑटो मोबाइल्स के पार्ट्स, रबड़ आदि के सामान बनाते हैं। इसके लिए उनके पास बॉयलर आदि होते हैं और उसे चलाने के लिए उद्यमियों को मशीन के संचालन के लिए हर समय बिजली की जरूरत पड़ती है। लिहाजा बिजली की जरूरत को पूरा करने के लिए अधिकांश औद्योगिक इकाइ के पास जेरनेटर की व्यवस्था की गई है। इनमें से ज्यादातर डीजल से चलाए जाते हैं। लेकिन दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने फरीदाबाद में भी डीजल से चलने वाले जेनरेटर को 31 दिसंबर-2023 तक पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) में बदलने आदेश जारी किया था। एचएसपीसीबी के अधिकारियों के अनुसार ऐसे में अब डीजल से चलने वाले जेनरेटर पर विभाग कार्रवाई करेगी। टीम जगह-जगह निरीक्षण कर डीजल वाले जेनरेटर का जायजा लेंगे। इस बाबत लोगों को जागरूक भी किया जाएगा।
उद्यमियों की बढ़ेगी परेशानी
उद्यमियों का कहना है कि शहर में बिजली नहीं रहने पर वह कुछ मिनट या घंटों के लिए जेनरेटर चलाते हैं। इससे उनका मशीन में फंसा माल सुरक्षित रहता है। क्योंकि रबड़ के पार्ट्स बनाने के दौरान अगर बिजली चली जाए तो माल खराब होने का डर बना रहता है। लिहाजा एक से दो मिनट के जेनरेटर चलाकर बिजली की जरूरत पूरी की जाती है। थोड़ी देर होने पर उद्यमियों का काफी नुकसान होगा। इसके अलावा उद्यमियों का कहना है कि कई क्षेत्रों में अभी भी पीएनजी लाइन के नहीं होने पर उन्होंने जेनरेटर चलाने के लिए कनेक्शन नहीं लिया है। लिहाजा इससे उनकी परेशानी बढ़ेगी।
सोसाइटी में यह होगी दिक्कत
सोसाइटी स्थित बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट के संचालन में हर समय बिजली की जरूरत होती है। इसके चलते सोसाइटी के पदाधिकारी बिजली जाने पर जेनरेटर का इस्तेमाल करते हैं। यहां तक कि सोसाइटी में रह रहे लोगों को भी जेनरेटर से बिजली दी जाती है। बताया जा रहा है कि अधिकांश सोसाइटी में जेनरेटर डीजल से चलते हैं। सीएक्यूएम के आदेश के बाद उनकी परेशानी भी बढ़ सकती है। उन्हें बिजली की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
30 हजार के आसपास हैं जेनरेटर
जानकारी के अनुसार जिले में 30 हजार के आसपास जेनरेटर हैं। इनमें से कई ऐसे हैं, जिन्हें पीएनजी में नहीं बदला गया है। जानकारों का कहना है कि पीएनजी से चलने वाले जेनरेटर या डीजल इंजन को पीएनजी के बदलने में काफी खर्च आता है। 10 लाख से अधिक लागत आने के चलते कईयों ने अभी तक पीएनजी से चलने वाले जेनरेटर की व्यवस्था नहीं की है।
वर्जन-
सीएक्यूएम के आदेशानुसार 31 दिसंबर तक जेनरेटर को पीएनजी में बदलने का समय दिया गया था। ऐसे में डीजल से चलने वाले जेनरेटर को बंद कराया जाएगा। इस बाबत जुर्माने का भी प्रावधान है। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।
-संदीप सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, एचएसपीसीबी।
NEWS SOURCE : livehindustan
