अखिल भारतीय संत एकता आंदोलन परिषद एवं गुरु गोरखनाथ मानव कल्याण संस्थान एवं सर्व धर्म सद्भाव विश्व शांति मिशन के परमाध्यक्ष महंत कैलाशनाथ हठयोगी ने एक बयान जारी कर कहा कि देश के मानवतावादी स्वाभिमानी संतो महंतों धर्माचार्य पीरों फकीरों से अनुरोध किया है कि आज संपूर्ण भारत सहित विश्व कोरौना महामारी के साथ संघर्षरत है देश की अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो चुकी है समाज का हर व्यक्ति तनावग्रस्त है उद्योग धंधे चौपट हैं मठ- मंदिरों -गुरुद्वारों- चर्च- मस्जिद उपासना केंद्रों में ताला लग चुका है परमात्मा की पूजा आरती सब लोक डाउन के चलते बंद है आश्रमों में चलने वाले सत्संग एवं गरीबों असहायो के लिए लंगर बंद हो गए हैं प्रवासी गरीब मजदूर संत सैनिक किसान रोटी पानी के लिए परेशान हो चुके हैं कहीं तो भूख के मारे तड़प कर अपने जीवन को त्याग कर चुके हैं सीमा पर सैनिक परेशान हैं मर रहे है खेतों में किसान मर रहा है अपने आश्रमों में भक्तों के बिना संत मर रहे हैं सड़कों पर प्रवासी मजदूर किसान, नौजवान, वृद्ध,बच्चे,गर्भावती महिला मर रही हैं
महंत ने सभी धर्मों के साधु संत और धर्माचार्य धर्म उपदेशको,पीरों फकीरों से अपील कर कहा कि अपने तमाम मतभेदों को भुलाकर राम भक्तों देशभक्तों,मानवता रक्षा की सेवा भावना से आगे आएं, संतों का जीवन मानव सेवा के लिए नर नारायण की सेवा करना ही हम सब का कर्तव्य है देशहित समाज हित में आपको आगे आना होगा देश की हालत अत्यंत दयनीय हो चुकी है।
हमारे शासक कुर्सी बचाओ सरकार गिराओ सरकार बनाओ के अभियान में लगे हुए हैं जैसा की आप सभी ने मध्यप्रदेश में देखा होगा, सरकारों का दोषारोपण चल रहा है जिसके कारण संत सैनिक किसान प्रवासी मजदूर लघु उद्योग पति सब परेशान हैं सरकार और राजनीतिक दल अपना संपूर्ण समय दोषारोपण करने में लगा रहे हैं और देश हित में कोई नीति गत व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं देश की जनता-सभ्यता-संस्कृति से इन्हें कोई मतलब नहीं है इनका काम सिर्फ धर्म के नाम पर साधु-संतों को मूर्ख बनाना, संतो को आगे रख कर कभी गौ गंगा धर्म मंदिर के नाम पर देश समाज को बांटना लड़ वाना होता है
सवाल
1. क्या गौ हत्या बंद हो गई?
2. क्या गौ मांस निर्यात बंद हो गया?
3. क्या संसद भवन परिसर में गौ भक्त 1977 में शहीद हुए थे उनका स्मारक बन गया उनके परिवार जनों को आर्थिक मदद की गई?
4. गौशालाओ एवं सड़को,खेतो में गौ का क्या हाल है?
गौ, गंगा, गुरु के नाम पर धोखा, जिसे प्रकृति ने स्वयं प्रमाणित कर दिखा दिया कि गंगा स्वच्छ थी स्वच्छ है स्वच्छ रहेगी।
5. राम की नगरी अयोध्या में 80 साल के संत की भूख प्यास से मृत्यु हुई क्या प्रशासन या किसी राजनीतिक दल ने इसका संज्ञान लिया? ऐसे कितने ही धर्म स्थानों, तीर्थ स्थानों आश्रमो पर हादसे हुए हैं क्या कोई राजनीतिक दल हम संतों का संज्ञान लेता है?
जनता त्रस्त सरकार मस्त
जनवरी में जब पता ही चल चुका था की करोना का मरीज आपके भारत में पाया गया है तो नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम को रोका जा सकता था तथा उस पर खर्च किए गए बजट से आप आने वाले संकट को रोक सकते थे जो कि एक बहुत बड़ी चूक साबित हुई जिसमें बेरोजगारी भुखमरी उद्योग धंधे चौपट हो गए प्रवासी मजदूर किसान नौजवान इन सब की दुर्गति हुई इन सभी कारणों के लिए यदि कोई जिम्मेदार है तो वह निहित स्वार्थ अलगाववाद, झूठी शान, दिखावा, छलावा, साधु संत सैनिकों किसानों नौजवानों राम भक्तों के साथ धोखा किया गया है इसलिए सभी धर्म आचार्य पीरों फकीरों से अनुरोध है
महंत का कहना है कि यदि भगवान अल्लाह ईश्वर को मानने वाले ही नहीं होंगे फिर मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा चर्च उपासना केंद्रों में सत्संग कौन सुनेगा और कौन करेगा???
“सभी धर्म करे पुकार, देश धर्म करो स्वीकार”
कोई भूखा ना मरे, कोई भूखा ना रहे।।
उद्घोष के साथ आगे आए एवं कावड़ यात्रीयो के तर्ज पर मार्ग एवं यथा सम्भव स्थान पर भोजन पानी अल्प अवधि आराम की व्यवस्था कर उनकी सहायता करें प्रवासी मजदूर किसान नौजवान को अपनी मंजिल तक जाने में मदद करें ,गंगा यमुनी तहज़िब आपसी भाईचारे की रक्षा करते हुए विश्व गुरु भारतम् का झंडा दोबारा लहराया जाए।
संत सैनिक और किसान,
भारत देश महान,
भारत को भारत बनाना है,
मानवता को बचाना है,
करोना को भगाना है।।
महंत कैलाशनाथ “हठयोगी”
