
PM Narendra Modi Ayodhya: अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर का महत्वपूर्ण हिस्सा है ‘सप्त मंडपम’. इसे एक ऐसा विशेष स्थान समझिए, जिसे महर्षि वाल्मीकि, शबरी, अहिल्या, निषादराज और ऋषि अगस्त्य आदि का सम्मान करने के लिए तैयार किया गया है. ये सभी महाकाव्य रामायण की महत्वपूर्ण शख्सियतें हैं. खास बात यह है कि सभी अलग-अलग पृष्ठभूमि से आते हैं. दलित समुदाय कई लोगों से खुद को जोड़ता है, जिसमें महाकाव्य लिखने वाले वाल्मीकि भी शामिल हैं. ऐसे में यह समझना महत्वपूर्ण है कि राम मंदिर जैसा बनकर तैयार हो रहा है और जिस तरह की ‘नई अयोध्या’ चमक रही है, उसका शिल्पकार कौन है?
शबरी हों या अगस्त्य
जिनकी कुटिया में भगवान राम रुके थे, वह शबरी एक आदिवासी महिला थीं. निषादराज नाव चलाते थे जिन्होंने राम को गंगा पार कराई थी. अगस्त्य ऋषि ने राम को हथियार दिए थे जो रावण पर विजय प्राप्त करने में काफी मददगार साबित हुए. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ, तब पीएम नरेंद्र मोदी ने मंदिर परिसर में ऐसी जगह बनाने का विचार रखा था. इसके पीछे उद्देश्य सबसे महत्वपूर्ण हिंदू मंदिरों में से एक अयोध्या में भगवान राम की समावेशिता (सबको साथ लेकर चलने वाले नायक के तौर पर) को सामने लाना था. पीएम ने मंदिर प्रोजेक्ट पर काम करने वाले लोगों के साथ कई चर्चाओं में ऐसा विशेष स्थान बनाने का सुझाव रखा.
बताते हैं कि पीएम ने यह भी सुझाव दिया था कि चूंकि भगवान राम एक सूर्यवंशी हैं इसलिए उनका मस्तक सूर्य की किरणों की तरह चमकना चाहिए.
मंदिर के साथ अयोध्या पर जोर
मोदी बचपन से राम भक्त हैं. पिछले हफ्ते एक विशेष संबोधन में पीएम ने इसका जिक्र भी किया था. राम मंदिर आंदोलन में उनकी प्रमुख भूमिका रही. पीएम मोदी ने मंदिर निर्माण के साथ-साथ अयोध्या के विकास के लिए गुणवत्ता, संवेदनशीलता और भविष्य के दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया. एक बैठक में उन्होंने मंदिर को दिव्यांगों के लिए भी सुलभ बनाने की बात कही. इससे पता चलता है कि वह किस तरह अयोध्या के विकास में गहरी रुचि ले रहे थे.
कोरोना महामारी की घातक दूसरी लहर के बाद 26 जून 2021 को पीएम एक बैठक ले रहे थे. इसमें उन्होंने सभी एजेंसियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि सभी परियोजनाएं अयोध्या को एक आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने के हिसाब से लागू की जाएं. इसी का परिणाम है- ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बना. अयोध्या रेलवे स्टेशन चमक उठा. हाईवे बने और सरयू नदी पर क्रूज की सवारी शुरू हुई.
लोग तो दर्शन करने आएंगे लेकिन…
मोदी ने मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों से कहा था कि आस्थावान लोग इस पवित्र जगह दर्शन करने के लिए आएंगे. हालांकि इसकी गारंटी नहीं है कि वे ज्यादा समय तक रुकेंगे. एक अधिकारी ने टीओआई को बताया कि पीएम के सुझाव ने कई प्रोजेक्ट को प्रेरित किया. अधिकारी ने कहा, ‘PM ने कहा कि मंदिर के बाहर घूमने पर फोकस होना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाए कि जो भी लोग आएं वे कुछ दिन शहर की अलौकिक भव्यता को देखने के लिए रुकें. शहर का आकर्षण ही कुछ ऐसा होना चाहिए.’
2018 में अयोध्या में दीपोत्सव के दौरान पीएम मोदी ने अयोध्या और कोरिया के बीच ऐतिहासिक कनेक्शन पर जोर दिया. एक समय अयोध्या की राजकुमारी का विवाह कोरिया में हुआ था. उन्होंने इस कनेक्शन को प्रमुखता से सामने रखने की बात कही जिससे अयोध्या और भगवान राम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिकता दुनिया को समझ में आए. उनके गाइडेंस पर ही कोरिया की प्रथम महिला को अयोध्या आमंत्रित किया गया था जिससे प्राचीन संबंधों को मजबूत किया जा सके.
धार्मिक स्थल की महत्ता को देखते हुए पीएम ने यह भी कहा कि मंदिर का ढांचा इतना मजबूत होना चाहिए कि कम से कम 1000 साल तक यूं ही बना रहे. सूत्र यह भी बताते हैं कि पीएम ने लगातार मंदिर ट्रस्ट, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, पीएमओ और यूपी के अधिकारियों, मंत्रियों के साथ परियोजनाओं की समीक्षा की l
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