अपने घर रहेंगे तो परिवार के साथ सुकून से रहेंगे, इसलिए सोचा गांव चले जाते हैं
फरीदाबाद : माता-पिता तो हर हाल में गले लगाते हैं, इसलिए सोचा गांव चले जाते हैं। लॉकडाउन खुलेगा, तो फिर आएंगे। अपने घर रहेंगे, तो परिवार के साथ सुकून से रहेंगे। हम यहां की परेशानी से बचे रहेंगे। बाहर की खीर से तो घर की चटनी भली। कुछ ऐसे ही मन के भावों को शब्द दिए मध्य प्रदेश के बरपुला, छटैनी, भनिगवां तथा विजयसोता गांव के प्रवासियों ने।
प्रवासी मजदूर औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में कई वर्षों से रह कर रोजी-रोटी कमा रहे थे। अब लॉकडाउन के चलते विपदा आई, तो याद आ गई गांव की माटी और माता-पिता के स्नेह की। घर जाने की सोच के चलते आवेदन किया हरियाणा के सरल पोर्टल पर। प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ने जाने की तैयारी कर दी। लॉकडाउन का पालन कराना, स्वास्थ्य जांच और फिर रेलवे टिकट की व्यवस्था कराना। इसी के चलते मंगलवार को मध्य प्रदेश के बहुत से प्रवासी मजदूर ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचे थे ट्रेन से अपने घर जाने को।
मैं लॉकडाउन से पहले यहां जूस बेचता था। अब कई दिनों से काम नहीं है। पिता समय लाल और माता फूलकली ने मुझे घर आने को कहा था। बोले थे, बेटा आंखों के सामने रहोगे तो चिता नहीं होगी। बस इसलिए गांव जा रहा हूं।
-राधेश्याम, मूल निवास मध्य प्रदेश। लॉकडाउन खुलने का तो कुछ पता नहीं है। वेतन भी नहीं मिल रहा। बाबू जी (पिता) मुन्ना लाल और माता फूलवती ने मोबाइल फोन पर बातचीत में कह दिया था कि घर चले आओ। अब यहां जगह-जगह बंट रही खिचड़ी और खीर खाने से तो अच्छा है कि घर की चटनी के साथ दो रोटी खा लें।