
Kisan Andolan: पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों से दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों को अलग-अलग जगहों पर रोक दिया गया है. एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत कई मांगों को लेकर शुरू हुए किसान आंदोलन को आज तीसरा दिन है. पंजाब से आने वाले किसानों को शंभू और खनौरी बॉर्डर पर रोक कर रखा गया है. पुलिस के कड़े इंतजाम की वजह से किसान तमाम कोशिशों के बाद भी बॉर्डर्स को पार नहीं कर पा रहे हैं. वहीं, पंजाब के बठिंडा और पटियाला में किसान रेलवे ट्रैक पर जम गए हैं. बता दें कि किसान हमेशा से अपने हक के लिए आवाज उठाने को एकजुट होते रहे हैं.
किसान नेताओं की बात करें तो स्वामी सहजानंद सरस्वती से लेकर महेंद्र सिंह टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी से लेकर राकेश टिकैत अगुआई करते रहे हैं. अब जगजीत सिंह दल्लेवाला व सरवन सिंह पंढेर किसानों का नेतृत्व कर रहे हैं. इंदिरा गांधी के समय एक किसान नेता तो ऐसे भी हुए, जिन्होंने 1974 में पूर्व प्रधानमंत्री की एक रैली में शेर ही छोड़ दिया था. उन्होंने एक बात नहीं मानने पर ये कारनामा कर दिया था. हम बात कर रहे हैं किसान नेता बिहारी सिंह बागी की. तब इंदिरा गांधी उत्तर प्रदेश के दादरी में गुर्जर नेता रामचंद्र विकल की चुनावी सभा में शामिल होने आई थीं. उनकी रैली में बड़ी तादाद में लोग जुटे थे, लेकिन शेर को देखकर भीड़ अपनी जान बचाकर भागने लगी.
इंदिरा गांधी के करीबी थे बिहारी सिंह बागी
उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले में दादरी के किसान नेता बिहारी सिंह बागी को इंदिरा गांधी का काफी करीबी माना जाता था. किसान आंदोलनों में आगे बढ़कर हिस्सा लेने के कारण दादरी क्षेत्र के लोग बिहारी सिंह को काफी पसंद भी करते थे. वह दादरी विधानसभा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते थे. उन्होंने इंदिरा गांधी से टिकट मांगा, लेकिन वह चौधरी चरण सिंह के मुकाबले उनकी टक्कर का एक किसान नेता तैयार करना चाहती थीं. उन्हें बागपत से सांसद रामचंद्र विकल में इतना माद्दा नजर आता था. इसीलिए इंदिरा गांधी ने विकल को सांसद रहते हुए यूपी सरकार में कृषि मंत्री बनवाया था. फिर बिहारी सिंह के बजाय विकल को दादरी विधानसभा से चुनाव मैदान में उतार दिया. इससे बिहारी सिंह नाराज हो गए.
बिहारी सिंह बागी को शेर छोड़ने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया.
इंदिरा गांधी को बिहारी सिंह की चेतावनी
इंदिरा गांधी रामचंद्र विकल को किसी भी तरह से जिताना चाहती थीं. लिहाजा, वह खुद दादरी में रामचंद्र विकल के लिए जनसभा में शामिल होने के लिए पहुंच गईं. वहीं, कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने से खफा हुए बिहारी सिंह बागी ने दादरी सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर ताल ठोक दी. उन्हें चुनाव चिह्न शेर मिला. जब ऐलान हुआ कि इंदिरा गांधी खुद विकल के प्रचार के लिए दादरी में जनसभा करेंगी तो बिहारी सिंह ने उनसे रैली में नहीं आने की चेतावनी दे डाली. जब इंदिरा गांधी उनकी चेतावनी को नजरअंदाज करके दादरी पहुंच गईं तो बिहारी सिंह ने गाजियाबाद में चल रहे एक सर्कस से किराये पर शेर लिया.
शेर छूटने के 5 मिनट में चली गईं इंदिरा
बिहारी सिंह बागी को सर्कस से पिंजरे और शेर 500 रुपये किराये पर मिल गया था. उन्होंने उसे एक रात कपड़े से ढककर रखा. फिर जब इंदिरा गांधी दादरी आईं और उन्होंने रैली में लोगों को संबोधित करना शुरू ही किया था, ठीक तभी बिहारी सिंह ने सभा में पिंजरा खोलकर शेर छोड़ दिया. खूंखार जानवर को खुला देखकर इंदिरा गांधी की सभा में जुटी भीड़ में भगदड़ मच गई. खुला शेर घूमता हुआ देखकर महज 5 मिनट में रैली में जुटी भीड़ तितर-बितर हो गई. भगदड़ मचने पर इंदिरा गांधी 5 मिनट में ही जनसभा छोड़कर चली गईं.
बिहारी सिंह बागी दादरी से चुनाव हार गए, लेकिन उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को भी जीतने नहीं दिया.
कांग्रेस प्रत्याशी विकल को मिली हार
निर्दलीय प्रत्याशी बिहारी सिंह बागी दादरी सीट से विधानसभा चुनाव हार गए. लेकिन, इंदिरा गांधी की रैली में शेर छोड़ने के उनके स्टंट का नतीजा ये निकला कि कांग्रेस प्रत्याशी रामचंद्र विकल भी नहीं जीत पाए. उस चुनाव में दादरी सीट से देवटा गांव के तेज सिंह भाटी ने जीत हासिल की. बिहारी सिंह बागी पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के भी करीबी माने जाते थे. उनके बेटे यतेंद्र कसाना ने बताया कि बिहारी सिंह बागी किसानों के बीच काफी पसंद किए थे. बिहारी सिंह बागी पर 1992 में एक किसान रैली में शामिल होने के लिए जाते समय गोलियां भी चलवाई गई थीं. हमले में वह बुरी तरह घायल हुए थे. हालांकि, वह बच गए. बागी का 29 नवंबर 2020 को निधन हो गया था.
NEWS SOURCE : news18
