
फरीदाबाद : आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।इसके बाद भी कार्ड नहीं बन रहे हैं। बादशाह खान (बीके) अस्पताल का आयुष्मान केंद्र कई दिनों से बंद पड़ा है और गेट पर ताला लगा रहता है। इसकी मुख्य वजह आयुष्मान मित्रों का नौकरी छोड़ना बताया जा रहा है। ऐसा ही कुछ हाल स्वास्थ्य केंद्रों का भी है।
सरकार की ओर से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निजी अस्पताल में उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आयुष्मान योजना चलाई जा रही है। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर लाभार्थी निजी अस्पताल में पांच लाख रुपये तक का उपचार करवा सकता है और उपचार में होने वाले खर्च को सरकार वहन करेगी। इसके तहत सरकार ने करीब एक वर्ष आयुष्मान को बदलकर चिरायु योजना कर दी थी और निरोगी हरियाणा के तहत चिरायु के लाभार्थियों की स्क्रीनिंग की जाती है। इसमें लाभार्थी की सभी प्रकार की आवश्यक स्वास्थ्य जांच की जाती है। यदि कोई बीमारी होती है तो उपचार के लिए योजना के तहत पैनल अस्पताल में रेफर किया जाता है।
यह है कारण
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आयुष्मान मित्रों का वेतन बहुत ही कम होता है। उनसे गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए अलावा अन्य कार्य भी लिए जाते हैं। इनके काम के कोई घंटे निर्धारित नहीं हैं। इसके चलते आयुष्मान मित्र नौकरी छोड़कर चले गए हैं।
इतने कार्ड बनाए गए
जिला स्वास्थ्य विभाग ने स्मार्ट चार लाख 77 हजार लोगों के कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा दो लाख 70 हजार लोगों को स्क्रीनिंग हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने 11 लाख चार हजार लाभार्थियों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अलावा विभाग ने अब बेड साइड सर्विस भी शुरू कर दी है। इसके तहत बीके अस्पताल में भर्ती होने वाले लाभार्थी की उसके वार्ड में जाकर नमूने लिए जाते हैं और उनकी रिपोर्ट के आधार पर जांच की जाएगी।
निजी अस्पताल बंद करेंगे उपचार
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की जिला इकाई के आयुष्मान विंग के चेयरमैन डॉ. सुरेश अरोड़ा ने बताया कि सरकार ने पहले ही उपचार का शुल्क बहुत कम रखा हुआ है और निजी अस्पतालों को कई महीनों से पैसे भी नहीं मिले हैं। ऐसे में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को उपचार दे पाना असंभव है। इसके चलते फैसला लिया गया है कि 15 मार्च से सभी निजी अस्पताल आयुष्मान लाभार्थियों का उपचार नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि सरकार को प्रदेश के निजी अस्पतालों को 200 करोड़ और जिले में दो करोड़ रुपये की राशि का भुगतान करना है, जोकि कई महीनों से लंबित है।
इसके लिए सामुदायिक सुविधा केंद्रों से समझौता हुआ है। जिले के सभी सीएससी पर आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा यदि किसी कोई परेशानी आती है तो बीके अस्पताल में आकर भी कार्ड बनवा सकता है। आयुष्मान लाभार्थियों के लिए अस्पताल स्तर पर भी कई सुविधाएं शुरू की गई हैं।
-डॉ. विनय गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
NEWS SOURCE : livehindustan
