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Home » सरकार और प्रवासी मजदूरों के हाहाकार में साधु संत जा बैठे गुफाओं में : महंत कैलाश नाथ हठयोगी

सरकार और प्रवासी मजदूरों के हाहाकार में साधु संत जा बैठे गुफाओं में : महंत कैलाश नाथ हठयोगी

faridabadnews24By faridabadnews24May 20, 2020No Comments4 Mins Read

अखिल भारतीय संत एकता आंदोलन परिषद एवं गुरु गोरक्षनाथ मानव कल्याण संस्थान कपूरथला पंजाब के परमाध्यक्ष महंत कैलाश नाथ हठयोगी ने देश और किसान प्रवासी गरीब मजदूर संकट के दौर से गुजर रहा है चारों तरफ प्रवासी मजदूर किसान नौजवान कारोबारी सभी परेशान हैं अर्थव्यवस्था चरमरा रही है सरकार घबरा रही है जिसको यथा स्थान लाने में समय लगेगा सरकारें दोषारोपण के माया जाल में फंसी हुई है सभी राजनैतिक दल इस समय कोरोना महामारी के संकट में लॉक डाउन कर, चुनावी भाषण बाजी कर रहे हैं ऐसी घड़ी में साधु-संतों धर्माचार्य धर्म उपदेशको का क्या कर्तव्य बनता है? क्या धर्माचार्य देश समाज प्रवासी गरीब मजदूर किसान नौजवान के कुछ नही हैं उनके प्रति साधु समाज का कोई उत्तरदायित्व नहीं है क्या? क्या साधु समाज इतना लाचार विवष हो गया है की इस सरकार एवं महामारी के दौर में वह गरीब मजदूर किसानों पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध सन्त समाज सहयोग के लिए साथ खड़ा नही हो सकता क्या?

 

कल इतिहास सन्त समाज को कोसेगा की इस परिस्थिति में हम मौन होकर संपूर्ण घटनाक्रम को दर्शक बने देख रहे थे और ना ही देश समाज गरीब प्रवासी मजदूरों किसान एवं उनके बच्चों के लिए सहयोग करने में संत समाज अपने आपको असहाय असमर्थ लाचार पंगु महसूस कर रहा था, जबकि मठ मंदिर गौशाला लंगर चलाने बनाने में सबसे बड़ा योगदान किसान प्रवासी गरीब मजदूर का होता है कोई ऐसा आश्रम मठ मंदिर नहीं है जहां पर किसानों द्वारा उत्पन्न किए गए अन्न,भूसा एवं अन्य सहयोग नही मिलता हो।

 

मठ मंदिर आश्रम गौशाला शिक्षण संस्थान अनाथालय वृद्ध आश्रम आदि समाज हित में भूमि दान के रूप में किसान देता है उसके निर्माण करने में सहयोग मजदूर करता है निर्माण संपन्न के बाद उसका मालिक पैसे वाले एवम राजनीति वाले लोग होजाते है उक्त मठ मंदिर शिक्षण संस्थाओं आदि के प्रबंधन/व्यवस्था में भूमिदाता अन्नदाता किसान मजदूर को साधारण सदस्य के रूप में भी रखा नही जाता है संकल्पित समर्पित भाव वाले बाबा जी को उक्त संस्था में पुजारी चौकीदार के रूप में ले लिया जाता है

 

धर्म संसद वाले युग निर्माता धर्माचार्य साधु संत प्रवासी मजदूर किसानों नौजवानों गरीबों के मदद के लिए आगे आने की बजाय हिमालय की गुफाओं या कहें कि अपनी तपस्थली में लीन हो गए हैं ऐसा प्रतीत होता है कि देश के बाबाओ मठाधीशो को मां गंगा ने बुला लिया है जो सीधे गंगोत्री में लुप्त हो गए हैं हम सभी धर्माचार्यों साधु-संतों का भी धर्म है कि अपने मतभेदों को भुलाकर मानवता रक्षार्थ के लिए आगे आएं मजदूर किसान ही देश धर्म संस्कृति के रक्षक हैं आप लोगों के प्रति श्रद्धा भक्ति भाव प्रवासी मजदूर किसान में है ना कि औरों के मन में।
वहां छलावा एवं दिखावा है इस संकट के दौर में लॉक डाउन होने के कारण सन्त समाज के भी कारोबार चौपट हो गए हैं अन्नो पार्जन, धनोपार्जन, सत्संग सम्मेलन भागवत कर्मकांड आदि दीक्षा शिक्षा भिक्षा के कार्यक्रम तीर्थ यात्रा आश्रमों से प्रकाशित पत्र पत्रिका ग्रंथों अन्य उत्पादन वस्तुओं के क्रय विक्रय आदि पर कुप्रभाव पड़ा है

 

वही चाटुकार राजदरबारी बाबा का धंधा आसमान को छू रहा है जिसके कारण से भी मन अत्यंत दुखी होगा लेकिन संत समाज का मूलधन सेवा करुणा सहयोग का भाव सर्वाधिकार सुरक्षित है उसके लिए आप राजनीतिक दलों का मोह, डर, भय से मुक्त हो कर प्रवासी मजदूरों किसानों नौजवानों परेशान लोगों की मदद के लिए आगे आएं सकारात्मक सोच अपनाएं।

 

लघु कुटीर उद्योगों जैसे शराब के ठेकों की तरह सरकार धर्म स्थानों को खोलें धर्म स्थानों सत्संग आदि के लिए दिशानिर्देश नीति बनाए सत्संग भवनों में काफी बड़ा स्थान होता है जहां दुरी एवं सरकारी नियमों का पूर्ण रूप से पालन होगा,अनेक कर्मकांड ब्राह्मण पुजारी सेवक लोक डाउन के कारण आर्थिक रूप से परेशान हैं उनके बारे में सरकार के 20 लाख करोड़ के भारी भरकम बजट में कोई पैकेज नहीं है लगता है कि कर्म कांडी ब्राह्मणों पुजारियों को भूख नहीं लगती है?

 

महंत ने कहा कि साधु संतों धर्माचार्यो के प्रयास आशीर्वाद सहयोग से बनी भाजपा की केंद्र राज्य डबल इंजन की सरकार संत समाज की घोर उपेक्षा क्यों कर रही है? आज भी हमारे मठ मंदिरों धर्म स्थानों को ताला लगा है? सरकार द्वारा धर्माचार्य के उपेक्षा पूर्ण रवैया के कारण से संत समाज अपने भविष्य को लेकर चिंतित एवं भयभीत है महंत कैलाश नाथ हठयोगी ने कहा कि सभी समान नहीं है अमीरी – गरीबी हर क्षेत्र में हर वर्ग में है सबकी अपनी अपनी आवश्यकताएं मान्यताएं हैं इनके लिए सरकार ने संतो महंतों मठाधीशो एवं पुजारियों के लिए बजट में कोई राहत नहीं दिया है अलग से इनके भी जीवन यापन के लिए आर्थिक बजट की घोषणा करें।

faridabadnews24 Sadhus saints go to caves in the cry of government and migrant laborers: Mahant Kailash Nath Hathayogi
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