
प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आबकारी नीति घोटाला मामले में 21 मार्च 2024 की रात गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद शुक्रवार को उन्हें राउज एवेंन्यू कोर्ट में पेश कर ईडी ने 10 दिन की रिमांड की मांग की है. वहीं, अरविंद केजरीवाल ने गिरफ्तारी के बाद कहा है कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे. इसके बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगर सीएम केजरीवाल इस्तीफा देने पर अड़े रहते हैं तो दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है. कानून के जानकारों का भी कहना है कि उप-राज्यपाल अनुच्छेद-239एए के तहत राष्ट्रपति को शामिल कर दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू करा सकते हैं.
राष्ट्रपति शासन के आलोचकों का कहना है कि ज्यादातर बार इसे राज्य में राजनीतिक विरोधियों की सरकारों को बर्खास्त करने के लिए बहाने के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. कुछ लोग इसे संघीय राज्य व्यवस्था के लिए खतरा मानते हैं. हालांकि, 1950 में संविधान लागू होने के बाद से ही केंद्र सरकार ने इसका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था. केंद्र में पिछली कांग्रेस सरकारों ने अनुच्छेद-356 का इस्तेमाल कर 100 से ज्यादा बार राज्यों सरकारों को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार संसद में कहा भी था कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अनुच्छेद-356 का सबसे ज्यादा दुरुपयोग करते हुए 50 बार राज्य सरकारों को बर्खास्त किया.
पहली बार कब और कहां की सरकार की गई बर्खास्त
देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अनुच्छेद-356 का पहली बार 20 जून 1951 को पंजाब सरकार के खिलाफ इस्तेमाल किया. तब उन्होंने पंजाब की चुनी हुई कम्युनिस्ट सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया था. हालांकि, कुछ लोगों का ये भी कहना है कि 1951 में पंजाब की कम्युनिस्ट सरकार ने अपने अंदरूनी कलहों से निपटने के लिए खुद ही राज्य में राष्ट्रपति लागू करने की मांग की थी. रिकॉर्ड के मुताबिक, पहली बार केरल की चुनी हुई कम्यूनिस्ट ईएमएस नम्बूदरीपाद की सरकार को 1959 में अनुच्छे-356 का इस्तेमाल कर बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया गया था.
‘कांग्रेस ने सबसे ज्यादा किया अनुच्छे-356 का इस्तेमाल’
फरवरी 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा था, ‘आरोप लगते हैं कि हम राज्य सरकारों को परेशान कर रहे हैं. लेकिन, इतिहास उठाकर देख लीजिए कि वो कौन सी पार्टी थी, जिसने अनुच्छेद 356 का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया. इन्होंने 90 बार से ज्यादा बार चुनी हुई सरकारों को गिरा दिया. इसमें से सिर्फ इंदिरा गांधी ने अनुच्छेद-356 का 50 बार इस्तेमाल किया. केरल की चुनी हुई वामपंथी सरकार को पंडित जवाहर लाल नेहरू पसंद नहीं करते थे. उन्होंने कुछ ही समय में चुनी हुई पहली सरकार को घर भेज दिया. तमिनलाडु में एमजीआर और करुणानिधि की सरकार को भी कांग्रेस ने ही बर्खास्त किया था. हर क्षेत्रीय नेता को कांग्रेस ने परेशान किया. राज्यपाल कार्यालय को कांग्रेस कार्यालय में बदल दिया गया’
कांग्रेस ने कब-कब कहां लगाया राष्ट्रपति शासन?
केंद्र ने 70 और 80 के दशक में विपक्ष की राज्य सरकारों को गिराने के लिए संविधान के अनुच्छेद-356 का खूब दुरुपयोग किया. देश की पूर्व पीएम इंदिरा गांधी पर इस अनुच्छेद के सबसे ज्यादा इस्तेमाल का आरोप लगता है. वह करीब 15 साल देश की पीएम रहीं. केंद्र की कांग्रेस सरकारों ने 1966 से 1977 के बीच 36 बार और 1980 से 1984 के बीच 15 बार अलग-अलग राज्यों में विपक्ष की सरकारों को गिराने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया. वहीं, केंद्र में जनता पार्टी के तीन साल के शासनकाल में 21 बार अलग-अलग राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया गया. आपातकाल के बाद जब इंदिरा गांधी फिर प्रधानमंत्री बनीं तो उन्होंने एकसाथ 9 राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया. प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने भी अलग-अलग राज्यों में 4 बार राष्ट्रपति शासन लगाया था.
बीजेपी ने कब-कब कहां लगाया राष्ट्रपति शासन?
प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की केंद्र सरकार ने 5 बार संविधान के अनुच्छेद-356 का इस्तेमाल कर अलग-अलग राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया था. वहीं, केंद्र में 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और महाराष्ट्र में इस अनुच्छेद का इस्तेमाल कर राष्ट्रपति शासन लगाया गया. केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद पहली बार 28 सितंबर 2014 से 31 अक्टूबर 2014 तक राष्ट्रपति शासन लगाया गया. उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार गिर गई थी. बता दें कि मोदी सरकार के दोनों कार्यकाल में अब तक 10 बार अनुच्छेद-356 का इस्तेमाल किया गया है.
किन राज्यों में कभी नहीं लगा राष्ट्रपति शासन?
देश के ज्यादातर राज्यों में कभी ना कभी किसी ना किसी की सरकार में राष्ट्रपति शासन लग चुका है. लेकिन, दो राज्य ऐसे भी जिनमें कभी अनुच्छेद-356 का इस्तेमाल कर राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया गया है. इनमें छत्तीसगढ़ और तेलंगाना शामिल हैं. बता दें कि देश में अब तक का सबसे लंबे समय तक राष्ट्रपति शासन जम्मू-कश्मीर में लगाया था. जम्मू-कश्मीर में सबसे लंबा राष्ट्रपति शासन 6 साल और 264 दिन तक लागू रहा था. वहीं, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में सबसे कम समय 7 दिन का राष्ट्रपति शासन लगा है. सबसे ज्यादा 10-10 बार राष्ट्रपति शासन उत्तर प्रदेश और मणिपुर में लगाया गया था.
क्या है अनुच्छेद-356, कब किया जा सकता है लागू
संविधान का अनुच्छेद-356 केंद्र सरकार को किसी भी राज्य सरकार को हटाकर प्रदेश का नियंत्रण अपने हाथ में लेना का अधिकार देता है. संविधान का अनुच्छेद-356 कहता है कि किसी भी राज्य में संवैधानिक तंत्र नाकाम होने या इसमें रुकावट पैदा होने पर राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है. किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के दो आधार हो सकते हैं. पहला, जब कोई राज्य सरकार संविधान के मुताबिक शासन चलाने में सक्षम ना हो और दूसरा, जब राज्य सरकार केंद्र सरकार के निर्देशों को लागू करने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई हो. राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य की सभी शक्तियां राष्ट्रपति के पास चली जाती है.
NEWS SOURCE : news18
