
कानपुर: कानपुर-बुंदेलखंड की 10 सीटों पर सियासी रण सज चुका है। भाजपा के ताने-बाने बुन चुके हैं लेकिन बाकी दलों में चेहरों की सियासत अभी उलझी हुई है। कुछ सीटों पर विपक्षी, चुनावी दंगल हांकने को तैयार हो चुके हैं ,लेकिन कहीं पर तस्वीर अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। वीवीआइपी सीट कन्नौज में अब भी विपक्ष रणनीतियां बनाने में ही उलझा हुआ है। फर्रुखाबाद, बांदा-चित्रकूट, हमीरपुर-महोबा का चुनावी मैदान विपक्षी खेमा नहीं होने के चलते खामोश है। कहीं बसपा की चुप्पी से चुनावी तीर तरकश से निकल नहीं पा रहे हैं। प्रत्याशियों की घोषणा नहीं होने के कारण चुनाव प्रचार भी विपक्ष का तेजी नहीं पकड़ रहा है। कार्यकर्ता भी खामोश होकर बैठे हैं। कानपुर-बुंदेलखंड की 10 सीटों पर सियासी रण की तस्वीर बयां करती विमल पांडेय की रिपोर्ट…
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी खेमा खामोश नजर आ रहा है। महासमर में फिलहाल भाजपा की फील्डिंग पूरी तरह से सजी है। तीसरे और चौथे चरण में होने वाले यहां के चुनावों की स्थिति साफ होने के बावजूद दलीय चिंता सूरमाओं को मैदान में उतारने की दिख रही है। सपा-कांग्रेस के गठबंधन वाली सीटों में अब भी मंथन का दौर चल रहा है। बसपा भी ज्यादातर सीटों में अपनी प्रत्याशिता को लेकर मुखर नहीं हो पा रही है।
कहीं जातीय समीकरण आड़े आ रहे हैं तो कहीं विपक्षी खेमे के प्रत्याशी का इंतजार है। सबसे पहले बात करते हैं फतेहपुर संसदीय क्षेत्र की। यहां से केंद्रीय राज्य मंत्री निरंजन ज्योति लगातार तीसरी बार भाजपा की प्रत्याशी बनी हैं। यहां कांग्रेस और सपा का गठबंधन अभी सुस्त है। सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, पूर्व सांसद डा. अशोक पटेल, जगदीश सिंह, बलिराज उमराव सपा से दावेदारी कर रहे हैं।
फिलहाल सपा प्रदेश अध्यक्ष यहां लगातार माहौल बनाते हुए चुनावी सभाएं कर रहे हैं। बसपा से टिकट की दावेदारी करने वाले जहानाबाद के पूर्व विधायक आदित्य पांडेय के भाजपा में शामिल होने के कारण बसपा यहां प्रत्याशी चयन में उलझी हुई है। फर्रुखाबाद लोकसभा क्षेत्र में भी भाजपा ने सबसे पहले अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा है। यहां चौथे चरण में मतदान 13 मई को होगा। भाजपा ने सांसद मुकेश राजपूत पर फिर से दांव लगाया है।
यहां आइएनडीआइ गठबंधन से समाजवादी पार्टी ने डा. नवल किशोर शाक्य को पहली बार मैदान पर उतारा है। यह सीट कभी कांग्रेस के सलमान खुर्शीद के पास थी। जबकि बसपा यहां अब भी प्रत्याशी को लेकर उलझी हुई है। हमीरपुर-महोबा संसदीय क्षेत्र के चुनावी दंगल में भाजपा ने लगातार तीसरी बार यहां के वर्तमान सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल पर भरोसा जताया है। सपा कांग्रेस गठबंधन ने यहां से अजेंद्र राजपूत को प्रत्याशी घोषित किया है। बसपा यहां भी खामोश है।
बांदा-चित्रकूट लोकसभा सीट में चुनावी तस्वीर अभी तक स्पष्ट नहीं है। भाजपा के सांसद आरके सिंह पटेल को फिर से आलाकमान ने मौका दिया है। हालांकि यहां पर भाजपा के पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र बड़े गेम चेंजर हो सकते हैं। चर्चा है कि वह बसपा के संपर्क में हैं। बसपा अगर यहां ब्राम्हण प्रत्याशी पर दांव लगाती है तो स्थितियां रोमांचक होगी। सपा गठबंधन से पूर्व मंत्री शिवशंकर सिंह पटेल मैदान में है। यहां पर बसपा प्रत्याशी को लेकर असमंजस है।
कानपुर में जातीय समीकरण को साधने उतरे योद्धा
कानपुर संसदीय सीट से पहले पुराने चेहरों पर मंथन करने वाली भाजपा ने एकाएक ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाते हुए रमेश अवस्थी को मैदान में उतार दिया है। कांग्रेस-सपा गठबंधन ने भी आलोक मिश्र के रूप में ब्राह्मण पर ही दांव लगाया है तो वहीं बसपा ने कुलदीप सिंह भदौरिया के रूप में क्षत्रिय को टिकट दिया है। इस सीट पर 7.50 लाख से अधिक ब्राह्मण मतदाता हैं, जबकि बाकी मुस्लिम, दलित व अन्य हैं।
वर्षों से भाजपा यहां ब्राह्मण उम्मीदवार ही उतार रही है। कांग्रेस ने भी भूधर नारायण मिश्र के बाद अब ब्राह्मण उम्मीदवार उतारा है। इस सीट पर फिलहाल तीनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी मैदान में होने से सियासी माहौल बनने लगा है। इस बार के लोकसभा चुनाव में प्रदेश की प्रमुख पार्टियों ने ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाया है। अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा से देवेंद्र सिंह भोले तीसरी बार हैट्रिक लगाने की जोर आजमाइश लगाए हुए हैं।
वहीं सपा से पूर्व सांसद राजाराम पाल मैदान में दम भर रहे। बसपा ने राजेश द्विवेदी को टिकट दिया है। इस सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबले की उम्मीद है। वहीं, सपा के गढ़ इटावा में भाजपा ने सुरक्षित सीट पर सांसद प्रो. रामशंकर कठेरिया को दूसरी बार चुनाव मैदान में उतारा है। भाजपा इस सीट पर दो बार चुनाव जीतकर मजबूत स्थिति में है। आइएनडीआइ गठबंधन से सपा प्रत्याशी जितेंद्र दोहरे मैदान में हैं।
सपा का गढ़ होने के कारण हाईकमान की प्रतिष्ठा इस सीट पर दांव पर लगी हुई है। बसपा ने सारिका सिंह बघेल को चुनाव मैदान में उतारा है। जालौन-गरौठा-भोगनीपुर संसदीय क्षेत्र में भाजपा के केंद्रीय राज्यमंत्री भानु प्रताप वर्मा चुनाव मैदान में हैं। यह सीट सपा के खाते में आ गई है जबकि कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी यहां से चुनाव लड़ने का सपा संजो रहे थे। सपा नेतृत्व ने नारायण दास अहिरवार के नाम पर मुहर लगाई है वहीं बसपा ने सुरेश गौतम को उम्मीदवार बनाया है।
टिकट का निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेना है, जो भी प्रत्याशी तय होगा संगठन ने उसे जिताने के लिए मजबूती के साथ तैयारी कर ली है। टिकट के प्रमुख दावेदारों में प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम, डा. अशोक पटेल, समरजीत सिंह आदि है, उम्मीद है कि एक-दो दिन में टिकट घोषित हो जाएगा। -सुरेंद्र सिंह यादव, सपा जिलाध्यक्ष, फतेहपुर
प्रत्याशी उतारने के लिए मंथन चल रहा है। बसपा प्रमुख के पास कई नामों पर चर्चा हो रही है। सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर ही बसपा अपना प्रत्याशी उतारेगी। निश्चित ही हमारा प्रत्याशी सभी दलों से मजबूत होगा। -दीप गौतम, बसपा जिलाध्यक्ष, फतेहपुर
प्रथम व द्वितीय चरण में होने वाले मतदान पर पार्टी का जोर अधिक है। यहां पर 20 मई को मतदान होना है, इसलिए यहां पर प्रत्याशी घोषित करने में देरी हो रही है। फिलहाल इसी सप्ताह प्रत्याशी की घोषणा होने की पूरी उम्मीद है। -रामकरण अहिरवार, बसपा जिलाध्यक्ष, हमीरपुर
आज लखनऊ में बैठक होने की संभावना है। फर्रुखाबाद सीट पर बसपा प्रत्याशी घोषित होने में अभी एक-दो दिन लगेंगे। पार्टी किसी जल्दबाजी में नहीं है। -वीर सिंह अम्बेडकर, बसपा जिलाध्यक्ष, फर्रुखाबाद
संसदीय क्षेत्र से राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव चुनाव लड़ेंगे। नवरात्र में वह कन्नौज आकर चुनाव लड़ने की घोषणा करेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर लोकसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार तेज कर दिया गया है। – कलीम खान, सपा जिलाध्यक्ष, कन्नौज
प्रत्याशी के चयन को लेकर पार्टी में मंथन चल रहा है। जल्द ही प्रत्याशी को लेकर निर्णय लिया जाएगा। – गुलाब सिंह वर्मा, बसपा जिलाध्य्क्ष, बांदा
कन्नौज में सबसे रोचक माहौल
सबसे रोचक मैदान कन्नौज संसदीय क्षेत्र का है। यहां भाजपा ने सुब्रत पाठक को फिर से प्रत्याशी बनाया है। यहां सुब्रत के मुकाबले में सपा मुखिया अखिलेश ने स्वयं चुनाव लड़ने के संकेत दिए थे। उन्होंने नवरात्र के दिनों में प्रत्याशी घोषणा की बात कही है। सपा का गढ़ कहे जाने वाली कन्नौज सीट में वर्ष 2019 में सुब्रत ने डिंपल को हराया था। इसके बाद से अखिलेश और सुब्रत के बीच जुबानी चुनावी जंग चल रही है। यहां बसपा ने भी इमरान बिन जफर को मैदान में उतार दिया, लेकिन अभी प्रचार का बसपा ने आगाज नहीं किया है।
NEWS SOURCE :jagran
