
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के अहम घटक, तेलुगु देशम पार्टी और जनता दल (यू) आंध्र प्रदेश व बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग उठाती रही हैं. चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार की इस मांग का पूरा होना ‘लगभग असंभव’ माना जा रहा है. लेकिन, एनडीए के इन दोनों ही अहम घटक दलों की इस डिमांड को पूरा करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार अगले महीने पेश होने वाले बजट में बीच का रास्ता निकाल सकती है. केंद्र सरकार राज्यों को दिए जाने वाले 50 साल के ब्याज रहित ऋण की राशि में 30 फीसदी तक का वृद्धि का ऐलान बजट में कर सकती है. यह लोन लेने को राज्यों को कुछ शर्तो को पूरा करना होता है. मोटे तौर पर ये शर्तें आर्थिक सुधारों से जुड़ी हुई हैं, जिन्हें मानना राज्यों के लिए कोई बड़ी बात नहीं है. साथ ही सरकार राज्यों को ब्याज रहित लोन लेने को प्रोत्साहित करने को शर्तों को भी आसान बना सकती है.
राज्यों के लिए ब्याज रहित लोन की शुरुआत केंद्र सरकार ने साल 2021 से की थी. इस लोन का एक बड़ा भाग पाने के लिए राज्यों को वित्त वर्ष 2023 से कुछ आर्थिक सुधार राज्यों को करने थे. यह लोन 50 वर्षों के लिए केंद्र सरकार देती है और इसके लिए राज्यों को कोई ब्याज नहीं चुकाना होता. अब सरकार इस लोन से जुड़े कुछ आर्थिक सुधारों में संसोधन कर सकती है और नई शर्तें जोड़ सकती है.
आरबीआई से मिले पैसे का होगा इस्तेमाल
लाइव मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस साल केंद्र सरकार को भारतीय रिजर्व बैंक से रिकॉर्ड 2.11 लाख करोड़ रुपये डिविडेंड मिला है. सरकारी खजाने में आए इस भारी-भरकम पैसे के दम पर ही अब सरकार राज्यों को इंटरेस्ट फ्री लोन की आवंटन राशि में इजाफा करने का मन बना रही है. सरकार लोन लेने के लिए राज्यों पर ऐसी शर्तें लागू कर सकती हैं, जिससे की केंद्र सरकार को राज्यों में अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन में आसानी हो.
अभी चल रही है चर्चा
रिपोर्ट के अनुसार, ऋण के लिए अनिवार्य सुधारों की लिस्ट में से कुछ को हटाने और नई शर्तें जोड़ने को चर्चा चल रही है. यह शर्त लगभग फाइनल हो चुकी है कि 50 वर्षीय ब्याज रहित ऋण को राज्य अपने कैपेक्स के सब्सिट्यूट के रूप में इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. इस साल फरवरी में पेश हुए अंतरिम बजट में वित्त मंत्री ने 1.3 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान ‘पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता’ मद में किया था. इसमें से 75,000 करोड़ रुपये या कुल राशि का 58 फीसदी राज्यों द्वारा किए जाने वाले सुधारों से जुड़ा हुआ था.
11 राज्यों को अभी मिला है स्पेशल स्टेटस
वर्तमान में भारत में 11 राज्यों को इस तरह की विशेष श्रेणी का दर्जा दिया गया है.इनमें असम, नागालैंड, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मिज़ोरम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और तेलंगाना शामिल हैं.तेलंगाना राज्य के गठन के बाद राज्य को आर्थिक रूप से मदद करने के लिए उसे यह दर्जा दिया गया था.
NEWS SOURCE : news18
