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Home » मोदी जी, देश पूछता है की गौ मांस निर्यात कब बन्ध होगा? :- महंत कैलाश नाथ हठयोगी

मोदी जी, देश पूछता है की गौ मांस निर्यात कब बन्ध होगा? :- महंत कैलाश नाथ हठयोगी

faridabadnews24By faridabadnews24May 29, 2020No Comments5 Mins Read

अखिल भारतीय संत एकता आंदोलन परिषद एवं गुरु गोरक्षनाथ मानव कल्याण संस्थान कपूरथला पंजाब के परमाध्यक्ष महंत कैलाश नाथ हठयोगी ने एक बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से अनुरोध किया है कि अपने वचन संकल्प को याद कर केंद्र सरकार पूरा करें देश में गौ हत्या बंद हो तथा गौ मांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए आपकी सरकार गुरु गंगा गोरक्षा मंदिर धर्म स्थानों तीर्थ स्थानों की रक्षा सुरक्षा के नाम पर बनी है लोगों ने विशेष रूप से सनातन धर्म को मानने वाले लोगों ने पूर्ण सहयोग कर आप को सत्ता सौंपी एवं डबल इंजन की सरकार बनाई अभी तक आप की सरकार ने गौ माता के लिए कुछ भी नहीं किया है

 

गायों की जो दयनीय हालत है उसे सड़कों पर आप देख सकते हैं गोचर भूमि पर भू माफियाओं का कब्जा निरंतर जारी है गौ माता के रक्षक रक्षार्थ कोई केंद्रीय नीति नहीं है गौ माता राम भरोसे घूम रही है गौशालाओं में उन्हें भरपेट भोजन नहीं मिलता है वहां पर ऐसे लोगों को व्यवस्था सौंप दी गई है जिन्हें केवल मात्र गांव गौशाला के नाम पर दान अनुदान चाहिए आप राजकीय गौशालाओं का रिकॉर्ड मंगा कर देख ले तो पता चलेगा कि गौशालाओं में कितनी गाय भूख प्यास से और सेवा भाव देख रेख की कमी से मृत्यु को प्राप्त हुई हैं गौशालाओं को सेवा भाव की भावना से बनाया जाए ना कि दान अनुदान अधनूर उपार्जन व्यवसाय का संसाधन के रूप में गांव के नाम पर धर्मांधता का पाठ पढ़ा कर धार्मिक उन्माद ना फैलाया जाए जिस कारण देश समाज में तनावपूर्ण वातावरण तैयार हो मेरा मानना है कि केंद्र सरकार ईमानदारी के साथ गौ हत्या पर पूर्ण पाबंदी के लिए केंद्रीय कानून बनाए गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दे एवं गोमांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए.
7 नवंबर 1967 संसद भवन पर गोरक्षा प्रदर्शन के दौरान शहीद गो भक्तों की स्मृति में गौ भक्त शहीद स्मारक का निर्माण कराएं देश प्रत्येक भूभाग में नेताओं की मूर्तियां लग सकती हैं

 

1.तो फिर शहीदों गौ भक्त के नाम पर संसद भवन में परिसर स्मारक बनाने में विलंब क्यों?
2. 07 नवंबर1967 के बाद आज तक धर्म के ठेकेदार साधु संत गोहत्या पाबंदी के लिए कोई आंदोलन क्यों नहीं किए? सरकार और धर्म के ठेकेदार साधु संत नित्य प्रति नए-नए प्रयोग देश समाज पर कब्जा रखने के लिए करते हैं कभी गौ माता तो कभी गंगा कभी मंदिर कभी सौंदर्य करण इत्यादि गोहत्या पाबंदी के लिए आज कोई क्यों नहीं बोलता है? सरकार अपने हित के लिए लोकप्रियता के लिए हर कार्य कर रही है जिसमें नाम और दाम का लाभ है निस्वार्थ सेवा भाव का ज्ञान देने वाली सरकार और उसके हमदर्द सच्चाई को क्यों नहीं बोलते हैं मठ मंदिर तोड़ना बंद करो गौ हत्या बंद करो आदि मठ मंदिर धर्म स्थानों को खोलें जबकि सरकार के कोष को भरने के लिए शराब की दुकानें खुल सकती हैं लेकिन धर्म स्थान नहीं खुल सकते ना ही धर्म स्थानों के पुजारियों,पुरोहितों ब्राह्मणों आदि के लिए सरकार द्वारा अन्न और धन की व्यवस्था नहीं की गई जो कि विचारणीय है

अंग्रेजों की सोच विचारधारा जिससे अंग्रेज शासक अपने शासनकाल में पूर्ण नहीं कर सके कुछ सोच कार्य को उनके भक्त काले अंग्रेजों द्वारा किया जा रहा है संस्कार विहीन धर्म कांड उपासना सिद्धांत मर्यादा विहीन समाज के निर्माण में वर्तमान सरकार पूर्ण प्रयास कर रही है जिसे समझना होगा अन्यथा

“चल उड़ जा रे पंछी अब देश हुआ बेगाना”की परिभाषा पूर्ण रूप से देखने को मिलेगी सरकार के वर्तमान व्यवहार से सर्वाधिक हानि कर्मकांड धर्म उपदेशक मंदिर के पुजारियों निर्धन संतो को हुई है दरबारी संतो मठाधीशो को कोई हानि नहीं हुई है उनके कारोबार व्यापार सुरक्षाकर्मी की व्यवस्था पूर्ण रूप से है उनके कारोबार व्यापार में वृद्धि हुई है सरकार के कारनामों के खिलाफ कुछ ना बोलने के लिए सम्मानित एवं पुरस्कृत किये गए है अन्यथा संत महंत महामंडलेश्वर अपना सन्यासी साधु धर्म का निर्वाह करते और काशी मैं चल रहे मठ मंदिरों तोड़फोड़ अभियान के खिलाफ सरकार के विरुद्ध जन आंदोलन करते लेकिन ऐसा नहीं हुआ जो कि विचारणीय विषय है

काशी क्षेत्र धर्म स्थानो की स्थापना काशी के विद्वानों सिद्धों साधको तांत्रिको द्वारा ग्रह नक्षत्र वास्तु शास्त्र के अनुसार किया गया था जिसे काशी में आकर परिक्रमा लगाने वाले भक्तों निवासियों को लाभ मिलता था जिसको सरकार ने ध्वस्त कर दिया है उसका पाप और परिणाम संपूर्ण देश को भोगना पड़ रहा है मठ मंदिरों को तोड़ने से पूजा-अर्चना बंद होने से दैव श्राप लगता है एवं दैवी आपदा आती है ऐसी शास्त्रोक्त मान्यता है संभवतः सत्ता के नशे में नास्तिक लोग इस बात को ना माने किंतु सत्य यही है कि दैव अनादर दैव्या लयों को तोड़े जाने से कर्मकांड को छिन्न-भिन्न नष्ट करने से देश समाज को अनेक परेशानियों के दौर से गुजरना पड़ता है अतीत काल में जिन शासकों ने इस प्रकार का कुकृत्य किया है उनका अंत बड़ा ही विभस्व एवं कष्टदायी हुआ है जिसका प्रमाण इतिहास के पन्नों में मौजूद है भविष्य में आने वाला समय अत्यंत गंभीर हो सकता है

faridabadnews24 Modi ji the country asks when will the beef meat export stop? : - Mahant Kailash Nath Hathayogi
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