सरयू तट स्थित कोरियाई पार्क भारत और कोरिया के मधुर संबंधों का एक बार फिर गवाह बना। अवसर था कोरियाई महारानी ‘हौ’ के श्रद्धांजलि समारेाह का। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी रामनगरी अयोध्या के सरयू तट स्थित कोरियाई पाक में स्थापित महारानी हौ की प्रतिमा पर कोरिया गणराज्य से सदस्यीय शिष्टमंडल अयोध्या पहुंचा और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की इस अवसर पर कोरिया और भारत की साझा संस्कृति भी परिलक्षित होती दिखी। जहां एक तरफ कोरियाई शिष्टमंडल ने अपनी परंपरा अनुसार महारानी हौ को श्रद्धांजलि अर्पित की तो वहीं संस्कृति विभाग के तत्वाधान में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुये जो भारत और कोरिया के मधुर संबंधों की मिशाल बनी।
सरयू तट स्थित कोरियाई पार्क में महारानी हौ को श्रद्धांजलि दी गयी।
कोरिया से आये शिष्ट मंडल ने कोरियाई महारानी हौ स्मारक पर पहुंचकर उन्हें नमन किया। भारत व दक्षिण कोरिया के बीच स्थापित द्विपक्षीय संबंधों की कड़ी में अयोध्या व किमहे शहर के मध्य सिस्टर सिटी संबंध वर्ष 1998 में स्थापित हुआ था। इसी संबंध को प्रगाढ़ करने के लिए अयोध्या में वर्ष 2001 में कोरियाई महारानी हौ के स्मारक स्थापना की गयी थी। तभी से प्रतिवर्ष केन्द्रीय करक क्लान सोसायटी के तत्वाधान में कोरियाई अधिकारियों एवं महारानी के वशंज कोरियाई नागरिकों का दल यहां आता रहा है और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता रहा है। इसी श्रृंखला में इस वर्ष भी केारियाई शिष्ट मंडल यहां पहुंचा और विभिन्न कार्यक्रमों के मध्य महारानी को श्रद्धांजलि अर्पित की। जिसमे महंत कैलाशनाथ हठयोगी भ्य शामिल थे अयोध्या(अवध) की राजकुमारी हे हौ सूरी रत्ना आज से 2000 वर्ष पूर्व सूरी रत्ना 48 ईसवी अयोध्या से दक्षिण कोरिया की यात्रा पर गई थी वहां उनका स्वयंवर कोरिया के कारक वंशी राजा किशोरों से किया विवाह उपरांत वहां महारानी बन गई.
वर्तमान खुदाई में प्राप्त सबूतों से सिद्ध हो रहा है कि अवध(अयोध्या) नगरी में भी भगवान गौतम बुद्ध कालीन मूर्ति भवन सामग्री मिल रही है इसका मतलब अयोध्या से गौतम बुद्ध का भी एक राजा होने एवं साधक होने के कारण लगाव रहा होगा, अवध नगरी गौतम बुद्ध की जन्म भूमि लुंबनी एवं निर्वाण प्राप्त स्थली कुशीनगर के समीप है जहां से प्रभावित होकर उन्होंने भी स्वेच्छा पूर्वक बौद्ध विहार आदि का निर्माण कराया होगा वैसे भी राम का प्रभाव कंबोडिया इंडोनेशिया मलेशिया साउथ कोरिया मोरिशियस इत्यादि देशों में देखने को मिलेता है एवं महान बुद्ध धर्म के अनुयाई भी देखने को मिलेंते है जो दोनों संस्कृति का पालन कर रहे है अवध अयोध्या एवं दक्षिण कोरिया देश अटूट संबंध है एवं बौद्ध धर्म को मानने वाले भी हैं अयोध्या की राजकुमारी साउथ कोरिया की महारानी थी ऐसा इतिहासकार बताते हैं वहां का राजपरिवार प्रतिवर्ष अयोध्या अगर महारानी सूरी रत्ना की समाधि पर भावांजलि अर्पित करता है एवं वहां के लोग रिश्ते के अनुसार अयोध्या को अपना ननिहाल अयोध्या का अंश मानते हैं दोनों देशों के रिश्ते बड़े ही भावुक एवं मानवीय मूल्यों संस्कारों के अनुकूल हैं जो विचारणीय हैं
