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Home » महात्मा गांधी जी के सपनों का भारत सत्य अहिंसा ऋषि कृषि में बसता है : महंत कैलाशनाथ हठयोगी

महात्मा गांधी जी के सपनों का भारत सत्य अहिंसा ऋषि कृषि में बसता है : महंत कैलाशनाथ हठयोगी

faridabadnews24By faridabadnews24June 8, 2020No Comments4 Mins Read

गुरु गोरखनाथ मानव कल्याण संस्थान कपूरथला पंजाब एवं संयुक्त आंदोलन परिषद के परमाध्यक्ष महंत कैलाश नाथ हठयोगी ने बयान जारी कर कहा कि सच्चे अर्थों में भारत गांव ऋषि कृषि सत्य अहिंसा में बसता है जहां पर शुद्ध आचरण जलवायु साधारण जीवन उच्च विचार के आदर्श आज भी देखने को मिलता है जहां पर एक दूसरे के साथ लगाव है यदि किसी कारणवश तनाव भी है तो उसका समाधान भी परिवार के चौपाल घर आंगन में परिवार के बड़े बूढ़े कर देते हैं जिसके कारण एक भारत श्रेष्ठ भारत स्वस्थ भारत देखने को मिलता है यदि जनप्रतिनिधि निष्ठा और आस्था के साथ निर्णय इच्छाशक्ति आत्मविश्वास के साथ अपने शासनकाल के दौरान 25 % भी कार्य गांव के लिए कर देते तो संभव होता है गांव से पलायन कर शहरों की ओर नहीं भागते किंतु अफसोस है

 

कि जो विश्वास विकास के कार्य होंगे सबसे पहले शहरों में होंगे स्कूल अस्पताल कॉलेज खेल के मैदान पार्क फुटबॉल वगैरह गांव में यदि सरकार अपनी योजना के अंतर्गत सड़क बिजली स्वास्थ्य शिक्षा लघु कुटीर उद्योगों की स्थापना कर दे दे तो शायद शहरों की तरफ भाग कर आने जाने का सिलसिला थम जाता और लोग महामारी करो ना जैसे संक्रमण से भी बच जाते समस्याएं अनेक हैं जो राजनेताओं दलों द्वारा उत्पन्न की हुई है महात्मा गांधी जी के सपनों का भारत गांव खेतों खलिहान ओ सत्य अहिंसा ऋषि कृषि में बसता है ना की गगनचुंबी भावना शहरों में बसता है केंद्र सरकार को अपनी पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत सर्वाधिक ध्यान गांव की तरफ देना होगा सरकार देश को प्रयोगशाला ना बनाएं जब गांव देहात क्षेत्र खलिहान किसान मजदूर नौजवान खुशहाल होंगे तो भारत स्वयं ही खुशहाल सबल सशक्त बन जाएगा हाल ही में शहरों से जान बचाने के लिए नंगे पैर सिर भूखे पेट बिना पानी बिना संसाधन के पैदल चलने वाले किसान मजदूर नौजवान गांव देहात से थे उनमें एक भी देहरादून ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का पड़ा हुआ अथवा शहरों में बड़ा नहीं था इसलिए सरकार समाज सभी का संयुक्त प्रयास कर पक्ष विपक्ष के राजनेता अभिनेता भारत की आत्मा गांव देहात के विकास को प्रयास करना चाहिए जिससे स्वस्थ भारत स्वच्छ भारत युवा भारत आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर संसार को देखने को मिले श्वेत हरित क्रांति पर्यावरण के लिए सर्वाधिक संभावना गांव देहात में है

 

जहां के लोग परिश्रमी ईमानदार है कर्मठ है जहां कुआं तालाब नदियां बाग बगीचे हैं यदि किसी कारणवश नहीं है तो उनकी स्थापना हो सकती है जिसकी संपूर्ण देश समाज को आवश्यकता है प्रत्येक ग्राम पंचायत एक लाख पेड़ लगाए प्रत्येक किसान अपने परिवार के लिए खाद्यान्न दूध सब्जी का उत्पादन करें शेष बाजार जरूरतमंदों को बेच दे स्वरोजगार योजना आत्मनिर्भर भारत पहले ही गांव देहात में है उसे और मजबूत करने आर्थिक सहयोग देने की आवश्यकता है बहुत सारे वनस्पतियां की प्रजातियां लुप्त हो रही हैं उनका संरक्षण संवर्धन करना बहुत जरूरी है जो भारतीय चिकित्सा पद्धति की धरोहर है आयुर्विज्ञान और योग को स्वस्थ स्वरूप देना होगा व्यवसायीकरण टीवी चैनलों पर नाचने गाने कूदने से उसकी रक्षा नहीं हो सकती है उस संपदा धरोहर की रक्षा गांव देहात किसान नौजवान करेगा उनके उत्पादन परिश्रम का यथार्थ मूल्य उन्हें मिलना चाहिए देश में फलदार छायादार वृक्ष लगने चाहिए वृक्षों पर कटाई पर प्रतिबंध केवल दिखावा है सर्वाधिक वृक्षों की हत्या सुंदर्य करण मार्ग विस्तारीकरण के कारण हुई है जिससे रास्ते में हजारों किलोमीटर यात्रा करने पर सड़कों के दोनों तरफ के छायादार फलदार वृक्ष देखने को नहीं मिल रहे हैं जबकि 1992 से पहले वृक्ष की छाया फलों की बहार थी सड़क के किनारे छाया के साथ-साथ किसानों के लिए माया काफी प्रबंध था इनके कटने के बाद बेरोजगारी बढ़ गई है

 

गांव देहात का आदमी रोजी रोटी के लिए शहरों की ओर दौड़ना शुरू किया है पेड़ों के कटने से जलवायु मौसम पर प्रभाव पड़ा है वर्षा नहीं हुई नदी नारे तलाक हुआ सूखने लगे और जलस्तर गिर गया किसान परेशान गांव देहात का मजदूर कारोबारी परेशान हुआ बेरोजगार हुआ आता है केंद्र सरकार को ग्रामीण क्षेत्र के सर्वांगीण विकास पर ध्यान के साथ-साथ सर्वाधिक अर्थव्यवस्था देनी होगी जिससे गांव से लोगों का पलायन बंद हो और ग्रामीण स्वरोजगार लघु कुटीर उद्योगों को अपनाएं और लाभान्वित हो ग्रामीण युवा पढ़ लिखकर प्रोन्नति करें स्वस्थ भारत युवा भारत आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार कर सकें।

Ahimsa Rishi faridabadnews24 lives in agriculture: Mahant Kailashnath Hathayogi the true India of Mahatma Gandhi's dreams
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