
Germany Crime News: घर, जिसे सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है, वही अगर डर और दरिंदगी का अड्डा बन जाए तो इंसान की रूह कांप उठती है. जर्मनी से सामने आया यह मामला किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं. जहां एक पति सालों तक अपनी ही पत्नी के साथ ऐसा करता रहा, जिसकी कल्पना भी सिहरन पैदा कर देती है. बाहर से सामान्य दिखने वाला यह आदमी, अंदर से ‘जहन्नम’ छिपाए बैठा था. कोर्ट के फैसले के बाद सामने आया सच बताता है कि कैसे भरोसे, रिश्ते और कानून की खामियों का फायदा उठाकर एक शख्स ने सालों तक अपराध किया. पत्नी को नशे की दवा देकर बेहोश करना. फिर उसका शोषण करना और उसका वीडियो इंटरनेट पर शेयर करना. यह सिलसिला सालों तक चलता रहा, और किसी को भनक तक नहीं लगी.
क्या है पूरा मामला?
पश्चिमी जर्मनी के आचेन शहर की कोर्ट ने 61 साल के फर्नांडो पी. को अपनी पत्नी को सालों तक नशे की दवा देकर बेहोश करने, उसका यौन शोषण करने और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग इंटरनेट पर साझा करने का दोषी पाया. आरोपी पेशे से स्कूल में चौकीदार था और सामान्य पारिवारिक जीवन जीता दिखता था.
कैसे करता था वह यह घिनौना अपराध?
कोर्ट के मुताबिक आरोपी चुपचाप अपनी पत्नी को दवा देकर बेहोश करता था. इसके बाद वह अपने अपराध को कैमरे में रिकॉर्ड करता और उन वीडियो को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और ग्रुप चैट्स में शेयर करता. यह सब पत्नी की जानकारी और सहमति के बिना होता रहा.
कितने साल चला यह ‘खामोश जुल्म’?
कोर्ट ने आरोपी को 2018 से 2024 के बीच किए गए अपराधों में दोषी ठहराया, हालांकि जांच में यह भी सामने आया कि आरोप लगभग 15 साल तक फैले हो सकते हैं. कोर्ट ने 34 मामलों में निजी जीवन और व्यक्तिगत अधिकारों के गंभीर उल्लंघन की बात कही.

Credit: Nur Ja Heisst Ja
कोर्ट का फैसला क्या रहा?
आचेन की कोर्ट ने फर्नांडो पी. को 8 साल 6 महीने की जेल की सजा सुनाई. कोर्ट ने गंभीर बलात्कार, खतरनाक शारीरिक नुकसान, यौन उत्पीड़न और यौन जबरदस्ती
जैसे मामलों में दोषी ठहराया. हालांकि कुछ आरोपों से उसे बरी भी किया गया, जिनका विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है.
जैसे मामलों में दोषी ठहराया. हालांकि कुछ आरोपों से उसे बरी भी किया गया, जिनका विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है.
फ्रांस के ‘पेलिकोट केस’ से तुलना क्यों?
यह फैसला ठीक एक साल बाद आया है, जब फ्रांस में डोमिनिक पेलिकोट को दोषी ठहराया गया था. उस मामले में पेलिकोट ने करीब 10 साल तक दर्जनों अजनबियों को बुलाकर अपनी पत्नी के साथ अपराध करवाए थे. दोनों मामलों ने यूरोप में महिलाओं के खिलाफ हिंसा और सहमति के कानून पर बहस को फिर से तेज कर दिया.
कानून की खामियां और बड़ा सवाल
महिला अधिकार संगठन Nur Ja Heisst Ja (Only Yes Means Yes) ने इस केस को बेहद अहम बताया. संगठन का कहना है कि जर्मनी में अब भी सहमति को “No means No” के सिद्धांत से देखा जाता है, जो नशे की हालत में पीड़ित महिलाओं को न्याय से दूर कर देता है. संगठन “Yes means Yes” कानून की मांग कर रहा है.
‘ऑनलाइन यूनिवर्सिटी ऑफ वॉयलेंस’
फ्रांस की सांसद सैंड्रिन जोसो ने कहा कि इंटरनेट ने इस तरह के अपराधों को और खतरनाक बना दिया है. उनके मुताबिक सोशल मीडिया और वेबसाइट्स ऐसी जगह बन गई हैं, जहां अपराधी एक-दूसरे को सिखाते हैं कि अपराध कैसे करना है. उन्होंने इसे “ऑनलाइन यूनिवर्सिटी ऑफ वॉयलेंस” बताया.
सबसे चौंकाने वाली बात क्या है?
एक्टिविस्ट जिल एस. का कहना है कि सबसे डरावनी बात यह है कि आरोपी खुद को पूरी तरह सुरक्षित समझते रहे. उन्होंने कहा, ‘हजारों वीडियो घर में पड़े थे, और उसे लगता था कि कभी पकड़े नहीं जाएंगे.’
NEWS SOURCE Credit :news18
