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Home » गुरु गोरक्षनाथ जी की उपेक्षा भारत-नेपाल संबंधों में दरार का कारण : महंत कैलाशनाथ हठयोगी

गुरु गोरक्षनाथ जी की उपेक्षा भारत-नेपाल संबंधों में दरार का कारण : महंत कैलाशनाथ हठयोगी

faridabadnews24By faridabadnews24June 16, 2020No Comments5 Mins Read

गुरु गोरक्षनाथ मानव कल्याण संस्थान कपूरथला पंजाब अखिल भारतीय संत एकता आंदोलन परिषद के अध्यक्ष महंत कैलाश नाथ हठयोगी ने एक बयान जारी कर कहां की है नाथ संप्रदाय और नेपाल के संबंध आत्मा और शरीर की तरह अटूट है जिसे दोनों देश भलीभांति जानते हैं पर किसी कारणवश या कहें कि भौतिक सुखों के चलते इतिहास और संबंधों को अनदेखा कर रहे हैं भारत सदैव नेपाल को अपना छोटा भाई अनुज समझता रहा है दोनों देशों की संस्कृति सभ्यता कर्मकांड रहन-सहन खान-पान एक जैसा है नेपाल सनातन काल से भारत के प्रहरी के रूप में खड़ा है हम दोनों देशों की संस्कृति सोच सामाजिक ताना-बाना एक जैसा ही है

 

उसके साथ साथ रोटी बेटी के रिश्ते भी हैं धार्मिक सामाजिक व्यवस्था मान्यताएं एक जैसी हैं नेपाल के बिना भारत अपने आप में परिपूर्ण नहीं है वैसे ही भारत भी नेपाल के बिना अधूरा है दोनों के मिलन एवं सु मधुर संबंधों के कारण संसार का कोई भी देश भारत की तरफ सिर उठाकर नहीं देख सकता है है सर्वाधिक नेपाल वासी भारत को अपनी विरासत सच्चा मित्र राष्ट्र मानते हैं संसार में भारत-नेपाल की मित्रता एक मिसाल के रूप में है जो जगजाहिर है जिसे चीन भी भली भांति जानता है नेपाल के लगभग नागरिक अयोध्या काशी मथुरा वृंदावन चारों धाम की यात्रा पर आते हैं अध्ययन के लिए काशी पधार ते हैं ताकि नेपाल की सनातन संस्कृति लुप्त ना हो उसी प्रकार से भारतवासी लोग भी कैलाश मानसरोवर पशुपतिनाथ की पवित्र तीर्थ यात्रा नेपाल के मार्ग से होकर जाते हैं साथ ही भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन एवं वांगलङ्ग नदी में स्नान कर गणेश्वरी माता मंदिर एवं शिवावतार गुरु गोरखनाथ मंदिर मृगस्थली के दर्शन करते अपने जीवन को धन्य बनाते हैं

 

संसार में संभवत है कोई देश होगा जिसके मुद्रा पर गुरु गोरक्षनाथ जी का नाम अंकित हो लेकिन नेपाल के राष्ट्रीय मुद्रा पर गुरु गोरक्षनाथ जी के नाम चित्र अंकित रहे हैं उन्हीं के नाम पर गोरखा रेजिमेंट का गठन हुआ है जो विश्व की सर्वश्रेष्ठ अनुशासित वीर सेना मानी जाती है नेपाल राष्ट्र के लोग शिवावतार गुरु गोरक्षनाथ जी को परमेश्वर के रूप में मानते हैं एवं पूजते है नेपाल का राज परिवार सदैव नाथ पंथ के योगेश्वरो को श्रद्धा एवं सम्मान देते आ रहे हैं आज भी सर्वाधिक नाथ सिद्ध योगी जन नेपाल में पाए जाते हैं महाराज धीराज श्री 5 वीर विक्रम शाहदेव महेंद्र जी को मिलने का अवसर योगी नरहरी नाथ जी के महाराज के साथ गुरु गोरक्षनाथ मंदिर मृगस्थली काठमांडू नेपाल में मिला जहां महाराज महेंद्र जी महाराज श्री के चरणो में घंटों बैठकर नेपाल के भविष्य को लेकर चर्चा किया करते थे उस क्षण अनेक गंभीर विषयों पर उनकी चर्चा हुई मैं महंत कैलाश नाथ एक विद्यार्थी के रूप में मुख दर्शक सुनता रहा जिसकी चर्चा आज तक कभी भी कहीं भी नहीं किया जो महाराज का आदेश था किंतु संयोगवश भारत-नेपाल संबंधों में उत्पन्न स्थिति के बारे में कुछ कहने आग्रह करने का मन में ख्याल आया कि दोनों देश एक ही है आत्मा और शरीर का संबंध है दोनों एक दूसरे से अलग कैसे हो सकते हैं?

 

अतीत काल में भी तनावपूर्ण क्षण उत्पन्न हुए होंगे लेकिन तत्कालीन दोनों देशों की सरकारों एवं राज्य परिवार ने समस्या को सुलझा लिया होगा भारत नेपाल जैसा मित्र राष्ट्र संपूर्ण संसार में नहीं है अचानक सोच विचार धारा रिश्तो में जो खटास आई है उसे मिलकर समाप्त करना होगा अन्यथा भाई फूटे पड़ोसी लुटे वाली कहावत चरितार्थ हो होगी मेरा मानना है कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व को आत्मावलोकन करने की आवश्यकता है ना की उत्तेजना में आकर कोई ऐसी टीका टिप्पणी करने की जरूरत है जिससे संसार तमाशा देखें नेपाल भारत की संस्कृति सभ्यता खान-पान कर्मकांड उपासना पद्धति समान है फिर गतिरोध कैसा? किसी के कहने या बहका ने से भाई भाई अलग कैसे हो गए? दुख सुख का संबंध है मैं एक भारतीय एवं गोरख पंथी होने के कारण से शिव अवतार गुरु गोरखनाथ जी महाराज एवं नेपाल के सनातन संबंधों पवित्र भावनाओं को साक्षी रखकर नेपाल के माननीय प्रधानमंत्री एवं नेपाल वासियों से अनुरोध करता हूं कि भारतवर्ष सदैव आपका अपना है और सदैव आपका अपना रहेगा किसी प्रकार की आशंका करने की आवश्यकता नहीं है।नेपाल राष्ट्र के दार्शनिक महान इतिहास कार योगी नरहरि नाथ जी महाराज द्वारा रचित मृगस्थली स्थली पुण्या, नेपाल भाल मण्डले

 

तत्र गोरक्ष नाथेन मेघ माला शनैः कृताः।।

 

हमारे शासक ने नेपाल एवं नाथ पंथ के अटूट संबंधों के बारे में संभवतः परिचित नहीं है अपने किसी भी उद्घोष के दौरान कोई भी मंत्री एवं प्रधानमंत्री शिव अवतार गुरु गोरक्षनाथ जी महाराज और नेपाल के सनातन आध्यात्मिक संबंधों के बारे में कुछ उल्लेख नहीं करते हैं लेकिन अपने सम्बोधन में युद्ध से बुद्ध की बात करते नही थकते है किंतु गुरु गोरक्षनाथ जी की तपो भूमि एवं पुण्य भूमि नेपाल के साथ उनका नाम उल्लेख नही करते है सनातन सत्य को लेकर चलने मात्र से समस्त विवाद क्षणों में समाप्त हो सकते हैं संबंधों को लेकर दोनों पक्षों को आत्म चिंतन करना होगा एवं पूर्वजों के प्रधान रिश्तो को जीवित रखना होगा प्रत्येक देश समाज की व्यवस्था अध्यात्मिक शक्तियों के प्रभाव के कारण चलती है ऐसी सनातन धार्मिक मान्यताएं हैं ऐसी ही मान्यताएं भारत-नेपाल संबंधों में भी है किंतु अहम् ब्रह्मास्मि के चक्कर में दोनों देशों के शासक भगवान शिव अवतार गुरु गोरक्षनाथ जी को परम्पराओ को भूल बैठे है जिसके परिणाम स्वरूप वर्तमान स्थिति उत्पन्न हुई है हमें अपने अतीत कालीन गौरवमई इतिहास को जानना होगा एवं विचार करना होगा कि भूल आध्यात्मिक है या सामाजिक है अथवा राजनैतिक भूल इन्हें सुधारना होगा इस विषय पर विस्तार पूर्वक चर्चा भारत नेपाल मैत्री महासंघ अध्यक्ष आचार्य पूर्ण चंद्र उपाध्याय सेवानिवृत्त उपकुलपति महेंद्र संस्कृत विश्वविद्यालय दांग नेपाल से विस्तारपूर्वक चर्चा हुई।

faridabadnews24 Ignoring Guru Gorakshanath ji is the cause of rift in Indo-Nepal relations: Mahant Kailashnath Hathayogi
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