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Home » वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा, बार-बार भूकंप आने का कारण पता चला

वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा, बार-बार भूकंप आने का कारण पता चला

faridabadnews24By faridabadnews24June 29, 2020Updated:June 29, 2020No Comments5 Mins Read

रोहतक : भू-विज्ञानियों ने रोहतक में लगातार भूकंप आने का कारण पता लगा लिया है। उनका कहना है कि इंडो-ऑस्ट्रेलियन टेक्टोनिक प्लेट यूरेशियन प्लेट के टकराने और फॉल्ट लाइन के सक्रिय होने से  लगातार भूकंप आ रहे हैं। इससे दिल्‍ली-एनसीआर क्षेत्र में खतरा है। अभी इस संबंध में शोध में भू विज्ञानी अभी जुटे हुए हैं। शोध किए जा रहे हैं।  वरिष्ठ विज्ञानियों ने दावा किया है कि दिल्ली और हरियाणा के आसपास पांच फॉल्ट-रिज लाइन हैं। फिलहाल महेंद्रगढ़-देहरादून सक्रिय है। पिछले दो-तीन महीने से मथुरा फॉल्ट लाइन में भी सक्रियता के कारण ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद तक भूकंप के झटके आ चुके हैं।

इंडो-ऑस्ट्रेलियन टेक्टोनिक प्लेट यूरेशियन प्लेट के टकराने और फॉल्ट लाइन के सक्रिय होने से आ रहे भूकंप

भू-विज्ञानियाें के रिसर्च में सामने आया है कि धरती के अंदर सात टेक्टोनिक्ट प्लेटें हैं। भारत इंडो-आस्ट्रेलियन प्लेट पर टिका है। यह प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रहीं हैं। इनके टकराने से हिमालय क्षेत्र, हिंदूकुश क्षेत्र प्रभावित होने के साथ ही फॉल्ट लाइन(भ्रंश रेखा) तक प्रभावित होने से इनमें सक्रियता बढ़ गई है।

दिल्ली-एनसीआर के निकट हैं पांच फॉल्ट लाइन

वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. जेएल गौतम का दावा है कि दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और हरियाणा के निकट पांच फॉल्ट लाइन या फिर रिज (धरती के अंदर उभरा हुआ क्षेत्र) है। जब दो प्लेटों के जोड़ में कोई हलचल होती है तो रिज क्षेत्र में अंतर बढ़ता है। इससे भूकंप का असर होने के आसार बन जाते हैं। दूसरी ओर, फॉल्ट लाइन लिक्विड पर तैरती रहती हैं। फॉल्ट लाइन में दरारें भी होती हैं। जब भी प्लेट टकराती हैं तो लिक्विड पर तैरने वाली फॉल्ट लाइन में कुछ हलचल होती है। कुछ महीने बाद यह हलचल शांत हो जाती है।

 

इन क्षेत्रों में पड़ता है असर

महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट लाइन से हरियाणा के चार जोन प्रभावित होते हैं। दिल्ली-हरिद्वार रिज फॉल्ट लाइन और दिल्ली-सरगोदा फॉल्ट लाइन से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में प्रभाव पड़ता है। मथुरा फॉल्ट लाइन से ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद व इस फॉल्ट लाइन में दिल्ली का क्षेत्र प्रभावित होता है। सोना फॉल्ट लाइन से गुरुग्राम क्षेत्र प्रभावित होता है। महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट लाइन रोहतक शहर के ठीक नीचे से गुजर रही है। इसलिए जमीन के अंदर की मामूली हलचल भूकंप के रूप में होती है।

हरियाणा के 12 जिले संवेदनशील

हरियाणा के 12 जिले भूकंप के चलते संवेदनशील हैं। जोन-चार में आने वाले जिले संवेदनशील माने जाते हैं। जोन-तीन कम प्रभावित क्षेत्र, जबकि जोन-दो में भूकंप आने की बेहद कम संभावनाएं हैं।

दिल्ली में आ सकता है बड़ा भूकंप

उधर, एक बेवसाइट से बातचीत में देहरादून के वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक डॉ कलाचंद सैन ने कहा है कि इंडियन प्लेट्स के आंतरिक हिस्से में बसे दिल्ली-एनसीआर में भूकंप का लंबा इतिहास रहा है। एनसीआर क्षेत्र में लगातार भूकंप के झटके आ रहे हैं, जो दिल्ली में एक बड़े भूकंप की वजह बन सकती है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डेढ़ महीने के अंतराल पर 10 से ज्यादा भूकंप के झटके आने के बाद दिल्ली-एनसीआर में बड़ी तबाही आ सकती है। यह बड़े भूकंप आने का संकेत है।

वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के प्रमुख डा. कलाचंद सैन ने कहा, हम वक्त, जगह और तीव्रता का साफ तौर पर अंदाजा नहीं लगा सकते, मगर यह मानते हैं कि यहां एनसीआर क्षेत्र में लगातार भूकंप के झटके आ रहे हैं, जो दिल्ली में एक बड़े भूकंप की वजह बन सकती है। दिल्ली वैसे भी उच्च भूकंपीय क्षेत्र में आती है और एनसीआर तकरीबन 573 मील के दायरे तक फैला हुआ है।

पहले जींद में आते थे ऐसे भूकंप

रोहतक में पहले 4.1 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज किया गया था। फिर 2.4 और 2.8 तीव्रता का मापा गया है। 13-14 साल पहले जींद में भी इसी तरह के भूकंप आते थे। तब दिल्ली-सरगोधा रिज पर हलचल रहती थी। वर्ष 1720 में इस रिज में 6.7 क्षमता का भूकंप आया था और दिल्ली व समीपवर्ती इलाकों में भारी तबाही हुई थी। अब 300 सालों में यह रिज शांत है।

रोहतक के आसपास लगा रहे सिस्मोग्राफ

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र दिल्ली की ओर से रोहतक, झज्जर, बहादुरगढ़ में स्थायी सिस्मोग्राफ लगाए गए हैं। अब रोहतक के आसपास छोटे पैमाने पर भी तीन अस्थायी सिस्मोग्राफ लगाए गए हैं। ताकि लगातार आ रहे भूकंपों को रिकॉर्ड किया जा सके।

दिल्ली-एनसीआर सिस्मिक जोन चार में

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के भू-भौतिक विभाग के प्रोफेसर एवं कुलसचिव डा. भगवान सिंह ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर सिस्मिक जोन चार में है। उन्होंने कहा कि अरावली पहाडिय़ों का भूमिगत प्रसार सोहना की पहाडिय़ों से दिल्ली रिज होता हुआ हरिद्वार तक फैला है।

” फिलहाल महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट लाइन सक्रिय है। दो-तीन महीने के दौरान मथुरा फॉल्ट लाइन के सक्रिय होने से भी ग्रेटर नोएडा, दिल्ली के मथुरा फॉल्ट लाइन से जुड़े क्षेत्रों व फरीदाबाद तक भूकंप के झटके लग रहे हैं। भूकंप की सटीक भविष्यवाणी या इसकी तीव्रता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

– डा. जेएल गौतम, वरिष्ठ विज्ञानी, राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, नई दिल्ली।

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