फरीदाबाद : चेयरमैन (नवजीवन चैरिटेबल ट्रस्ट) हर्बल व प्राकृतिक चिकित्सक डॉ आशीष मौर्य ने स्वास्थ्य जागरूकता के तहत जानकारी देते हुए कहा मधुमेह जैसी लाइलाज बीमारी को अपने नियमित दिनचर्या वा खाद्य पदार्थों के नियमित बदलाव से इस बीमारी को नियंत्रण में किया जा सकता है, भारत में डायबिटीज के रोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है ऐसे में डायबिटीज को लेकर लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल आते हैं ,,जैसे इस बीमारी का कारण क्या है, शरीर को नुकसान क्या होता है क्या अनुवांशिक है आदि,,,
मधुमेह( शुगर )एक क्रोनिक मेडिकल कंडीशन है, जो लाइलाज है, लेकिन जीवन शैली में परिवर्तन करके इसे नियंत्रित किया जा सकता है, डायबिटीज को साइलेंट और पोटेंशियल किलर दोनों कह सकते हैं, साइलेंट इसलिए क्योंकि इसमें लक्षणों को नजरअंदाज किया जा सकता है, पोटेंशियल किलर इसलिए कह सकते हैं क्योंकि रक्त में शुगर का उच्च स्तर पाइजन के समान कार्य करता है, डायबिटीज एक अनुवांशिक रोग है इसका अर्थ यह नहीं कि अन्य लोगों में डायबिटीज का खतरा नहीं रहता, आनुवंशिकता डायबिटीज का एक बहुत बड़ा कारण है, अगर पेरेंट्स को डायबिटीज है तो लगभग 50, परसेंट इस बीमारी का होने का खतरा बढ़ जाता है, जिन लोगों में अनुवांशिकता का कारण नहीं है उनमें मोटापा, आलस्य, तनाव ब्लड प्रेशर के कारण भी यह बीमारी हो जाती है,
भारत की 5% जनसंख्या डायबिटीज से पीड़ित है, डायबिटीज जीवन शैली से जुड़ी हुई एक बीमारी है, यह बीमारी तब होती है जब अग्नाशय के द्वारा उचित मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता, इंसुलिन हार्मोन है जो रक्त में शर्करा को नियंत्रित करता है रक्त में शर्करा का स्तर कम होता है तो उसे हाइपोग्लाइसीमिया या फिर ज्यादा हो जाए तो हाइपर ग्लाइसीमिया भी कहते हैं, डायबिटीज की जो बात अधिक गंभीर बनाती है जैसे , मेटाबॉलिक सिंड्रोम, जिसमें किडनी का फेल होना,या ब्रेन स्ट्रोक, रेटिनोपैथी हार्ट अटैक आदि जैसे समस्या बढ़ जाती है,,
हेल्दी फूड का सेवन करने से व खराब आदतों में नियंत्रित करके इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है इसमें आपका खान-पान आपके ब्लड शुगर का लेवल को प्रभावित करता है, सब्जियां और फल साबुत अनाज, फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ आदि का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए, नियमित रूप से 30 मिनट तक व्यायाम योग हेल्थ चेक अप कराने के साथ-साथ, तनाव रहित जीवन व धूम्रपान आदि से दूरी बनाकर रखनी चाहिए, नवीनतम हर्बल चिकित्सा पद्धति व प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से लाइलाज बीमारियों का इलाज भी आसान हो गया है, इसे जीवन में अवश्य अपनाएं और अपने शरीर को निरोग करें,
