फरीदाबाद : प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ संकेत दे चुके हैं कि अब कभी भी पार्टी के जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा हो सकती है। पार्टी सूत्रों से जो जानकारी मिली है, उस पर यकीन करें, तो जिलाध्यक्ष का नाम बेहद चौंकाने वाला हो सकता है। सत्तारूढ़ दल में जिलाध्यक्ष का एक अलग रुतबा होता है। यही कारण है कि जिला अध्यक्ष पद पाने को पार्टी के कई पुराने व समर्पित कार्यकर्ता गोटियां फिट करने में लंबे समय से लगे हुए थे। मार्च माह में जब नारनौल से पार्टी के वरिष्ठ नेता व हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन के चेयरमैन गोविद भारद्वाज पर्यवेक्षक के रूप में रायशुमारी करने आए थे, तब उन्होंने अपनी रिपोर्ट पार्टी आलाकमान को दे भी थी और प्रदेश अध्यक्ष का नाम लटकने के कारण तब हुई रायशुमारी भी इन पांच महीनों में पुरानी हो गई।
अब जब पार्टी को प्रदेश में नया सरदार ओम प्रकाश धनखड़ के रूप में मिला, तो उन्होंने पूरे प्रदेश में अपनी नई टीम बनाने के मकसद से नए सिरे से पैनल तैयार किए। इस दौरान कई तरह के समीकरण बदले, बिगड़े और बने। पहले दौड़ में मौजूदा जिलाध्यक्ष गोपाल शर्मा का नाम भी आगे चल रहा था और उनके फिर से अध्यक्ष बनने की संभावनाएं प्रबल थी, पर पिछले दिनों धनखड़ ने यह भी संकेत दिए थे कि मौजूदा अध्यक्ष जो दो बार इस पद पर रह चुके हैं, तो उनके नाम पर विचार नहीं होगा। इसी से आशय लगाए जा रहे हैं कि वो दौड़ में पिछड़ गए हैं। गोपाल शर्मा वर्ष 2006-07 से 2009 तक और उसके बाद एक जनवरी-2016 से लेकर अब तक करीब पौने पांच साल लगातार अध्यक्ष पद पर रहे हैं। इस हिसाब से उनका कार्यकाल करीब तीन बार का हो गया है, हालांकि उनकी ओर से पूरे प्रयास अब भी जारी हैं कि उन्हें एक और मौका पार्टी में अध्यक्ष के रूप में सेवा का मिला।
जातिगत समीकरण बनेंगे अध्यक्ष का आधार
अध्यक्ष पद पाने की दौड़ में अन्य नाम केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के बेहद करीबी अनिल नागर, विधायक सीमा त्रिखा, पार्टी में 40 वर्षों से समर्पित कार्यकर्ता के रूप में सेवा कर रहे और वर्तमान में वरिष्ठ उपाध्यक्ष एमसी मित्तल, पार्टी के महामंत्री सोहनपाल छोकर व देवेंद्र चौधरी, पूर्व पार्षद ओम प्रकाश रक्षवाल, पंजाबी चेहरा धनेश अदलखा व राजकुमार वोहरा, जाट चेहरा वजीर सिंह डागर,आरएन सिंह व बिजेंद्र नेहरा के नाम प्रमुख हैं। यह भी जानकारी सामने आ रही है कि अगर गुरुग्राम में पंजाबी समाज से अध्यक्ष न बना, तो फिर बड़खल क्षेत्र की विधायक सीमा त्रिखा नई जिलाध्यक्ष हो सकती हैं। पूर्व में सीमा त्रिखा पार्टी में महिला मोर्चा की अध्यक्ष रह चुकी हैं। इसी तरह से गुरुग्राम व पलवल में वैश्य समाज से कोई अध्यक्ष न बना, तो फिर एमसी मित्तल के नाम पर मुहर लग सकती है। पृथला से गत चुनाव में टिकट लेने में सफल रहे पर जीत का वरण न करने वाले सोहनपाल छोकर की राजपूत समाज से दावेदारी है। अध्यक्ष बनाने में विधायकों की ओर से यह भी दबाव है कि किसी ऐसे चेहरे को जिला प्रमुख न बना दिए जाए, तो भविष्य में उनके लिए चुनौती खड़ी कर दे। बाकी इन सबसे इतर केंद्रीय राज्य मंत्री कृ़ष्णपाल गुर्जर की पसंद को सवोच्च प्राथमिकता पर रखने की बात भी सामने आ रही है। खैर अब इंतजार ज्यादा दिन का नहीं है।
