ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा का स्लोगन और प्रधानमंत्री के हंसते हुए फोटो के सामने अगर लिखा हो कि ‘गरीब को सस्ती दवाई मिले, गरीब को दवाई के बिना मरने की नौबत ना आए इसलिए पूरे देश में जन औषधि केंद्रों खोलें गए हैं’ तो अच्छे- अच्छे भी झांसे में आ सकते हैं
जी हां, ऐसा ही मामला जिला नागरिक अस्पताल में उस समय देखने को मिला जब सिविल अस्पताल की डिस्पेंसरी में दवा नहीं होने के बाद एक मरीज प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र पर पहुंचा। यहां पर मरीज को बाहर की महंगे दामों में दवा दे दी गई।
जब उस मरीज से बिल मांगा, तो बिल देने से मना कर दिया गया। साथ में धमकी दी गई कि यह औषधालय गृहमंत्री अमित शाह के लडक़े के हैं, जो पूरे देश में चल रहे हैं।
दरअसल, गांव गुढ़ा करनाल निवासी सलीम हल्का बुखार होने पर शुक्रवार को सामान्य अस्पताल में दवा लेने के लिए पहुंचे। डॉक्टर द्वारा जांच के बाद कुछ दवा लिखी गई, तो अस्पताल की डिस्पेंसरी में दवा नहीं मिली। यहां बताया गया कि 14 नंबर से दवा ले ले। यहां पर सस्ती दवा मिलती है। उनके कहे अनुसार यहां से दवा ली गई। 150 रूपये उन्होंने दवा के ले लिए। पीड़ित ने दवा का बिल मांगा तो उन्होंने बिल देने से मना कर दिया। किसी कागज पर मोहर लगाकर रसीद देने का कहा तो बोले यहां केवल दवा मिलती है।
जब इन दवाईयों को बाहर प्राइवेट मेडिकल स्टोरों पर पता किया गया तो दवाईयों की कीमत बहुत कम बताई गई। जिसके बाद वह दोबारा से औषधि स्टोर पर पहुंचे और दवाईयों की कमीत सही करने को कहा। मरीज ने फिर से बिल मांगा तो उन्होंने फिर बिल देने से मना करा दिया
स्टोर के संचालक अंकित से बातचीत करवाने के बाद दवा का बिल बनाकर दिया। लेकिन तीनों दवा के बैच नंबर में अंतर था ।
जन ओषधि केंद्र के फार्मासिस्ट अंजू पहले तो कुछ बोलने से मना करने लगे लेकिन जब बोलने के मजबूर किया तो बोले की यहाँ पर 700 प्रकार की दवाईया मिलती हैं।
उन्होंने स्पष्ट तौर पर मना कर दिया की बहार से कोई भी दवाई मंगवा कर नहीं बेचीं जाती हैं। और बिल में दवाई का गलत बैच नंबर लिखने पर भी मना कर दिया
रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव गौरव ने कहा कीऔषधि केंद्र के संचालक को आज बुलाया था लेकिन उसने कोरोना टेस्ट करवाया हैं इसलिए दो दिन के बाद बुलाकर जाँच करेंगे अगर दोषी पाया जाता हैं तो स्टोर संचालक के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
