नई दिल्ली : गणतंत्र दिवस पर उपद्रवियों द्वारा क्षतिग्रस्त किए गए लाहौरी गेट के साथ ही दिल्ली गेट का भी संरक्षण कार्य कराया जाएगा। इसके साथ ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए जाएंगे, ताकि भविष्य में कोई बाहरी व्यक्ति तिरंगा फहराए जाने वाले इस स्थान तक न पहुंच सके। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया है। जानकारों का कहना है कि लाहौरी गेट के जिस भाग में तिरंगा लगा है। वहां कोई भी आसानी से नहीं पहुंच सकता है। इस क्षेत्र में हर समय सीआइएसएफ की तैनाती रहती है, लेकिन एक बार ऐसी घटना हो गई है। इसलिए गेट को संरक्षित किए जाने पर विचार किया जा रहा है।
ऐसे में एएसआइ की योजना है कि कोई ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे स्मारक को भी नुकसान न पहुंचे और वहां तक आवागमन बंद हो जाए।

लालकिला में इस समय दो गेटों से आवागमन होता है। इसमें एक लाहौरी गेट है, जहां से आम जनता प्रवेश करती है, जबकि दूसरा गेट दिल्ली गेट है। यहां से वीआइपी लोगों और लालकिला के स्टाफ व एएसआइ के अधिकारियों को ही प्रवेश मिलता है। इन दोनों गेटों के मुख्य भाग के आर्च की ऊंचाई 42 फीट है, जबकि गेट की कुल ऊंचाई 100 फीट के करीब है। ये गेट चार मंजिला बने हैं। इन्हीं में से एक लाहौरी गेट पर सात गुंबदों के बीच तिरंगा लगा हुआ है, जिसके पास 26 जनवरी को उपद्रवियों ने अपना झंडा फहरा दिया था। करीब पांच साल पहले इन दोनों गेटों में संरक्षण कार्य कराया गया था। उस समय लाहौरी गेट के अग्र भाग की छत से कई ट्रक मिट्टी निकाली गई थी। यह भाग गेटों के अहाते वाला है। इसी भाग में प्रधानमंत्री 15 अगस्त को झंडा फहराते हैं। ऐसे अहाते किले के दोनों गेटों पर हैं। इन्हें औरंगजेब के समय बनाया गया था, जबकि 100 फीट वाले दोनों गेट लालकिला का मुख्य हिस्सा हैं। इसे शाहजहां ने किला बनाए जाने के समय ही बनवाया था। विभागीय अधिकारी के मुताबिक आगामी वित्त वर्ष में लालकिला के आवागमन के दोनों गेटों का संरक्षण कार्य किया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इन गेटों के संरक्षण कार्य के लिए प्रस्ताव तैयार किया है।
