फरीदाबाद : नगर निगम हर वर्ष मानसून से पहले नालों की सफाई पर करीब 2.5 करोड़ रुपये खर्च करता है, मगर बारिश होते ही नालों की गंदगी और पानी आवेरफ्लो होकर सड़कों पर दिखता है। अबकी भी ऐसे ही हालात दिख रहे हैं। हालांकि नगर निगम अधिकारी प्रमुख 32 नालों की सफाई के मामले में बेहतरी का दावा कर रहे हैं। जागरण ने जब शुक्रवार को प्रमुख नालों पर नजर डाली, तो कई नाले गंदगी से भरे पड़े थे।
निगम अधिकारी और ठेकेदार मिलकर सारी गड़बड़ करते हैं। करोड़ों रुपये यूं ही खर्च कर देते हैं। अगर सही तरीके से काम हो, तो दिखे भी। मैंने सदन की बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन अनसुना कर दिया गया।
-दीपक चौधरी, पार्षद, वार्ड 37 मानसून आने पर ही अधिकारियों को नालों की सफाई याद आती है। सफाई के लिए पहले ही प्लानिग होनी चाहिए, ताकि काम होने पर सफाई दिखे।
-गजराज नागर, वाइस चेयरमैन, कन्फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए। किस नाले की कब सफाई हुई और कितना खर्च हुआ, इसकी निगरानी होनी चाहिए। इसका ब्यौरा बड़े नालों के आसपास बोर्ड पर चस्पा हो, तभी पारदर्शिता आएगी।
-मुकेश शर्मा, पूर्व वरिष्ठ उप महापौर। काफी हद तक नालों की सफाई हो चुकी है। कई जगह थोड़ा-बहुत काम चल रहा है। जनजागरूकता की कमी है। इधर-उधर पॉलीथिन न फेंके। हम प्रयासरत हैं कि जल्द नालों की सफाई का काम पूरा हो। जहां नाले साफ नहीं हुए, उस जोन के संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
-डॉ.यश गर्ग, निगमायुक्त।
