
पिछले साल भी लाया गया था यह विधेयक
पिछले साल भी विधानसभा के बजट सत्र में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सरकार ने हरियाणा शव का सम्मानजनक निपटान विधेयक-2024 सदन में पारित किया था। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय की ओर से विधेयक को स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था, जिस पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कुछ आपत्तियां लगाते हुए बिल को वापस लौटा दिया। कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल और बीबी बतरा ने नए बिल पर चर्चा के दौरान सवाल किया कि सरकार बताए कि केंद्र सरकार ने पहले इस बिल को क्यों लौटा दिया था और अब इसमें क्या संशोधन किए गए हैं। इस पर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने बताया कि तीन नए आपराधिक (Haryana Three Ne Criminal Laws) कानूनों भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू होने के चलते नया विधेयक तैयार करना पड़ा है। कई मौके आए जब भड़े ने 20-25 दिन तक सड़कों पर शव को रखकर प्रदर्शन किया। किसी को भी शवों की बेकद्री का अधिकार नहीं है। इसलिए सरकार को नया कानून बनाना पड़ा है।
शव के साथ प्रदर्शन के लिए उकसाने वालों को भी होगी सजा
विधेयक के अनुसार शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन करना अपराध होगा। अगर कोई व्यक्ति शव का सही तरीके से अंतिम संस्कार नहीं करता है तो उसे एक लाख रुपये तक जुर्माने के साथ तीन साल की सजा हो सकती है। इतना ही नहीं, उकसाने वालों को भी सजा होगी। शव लेने के लिए अगर परिजनों द्वारा ठोस कारण बताया जाता है तो शव के अंतिम संस्कार के समय को 24 घंटे तक के लिए भी बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए कार्यकारी मजिस्ट्रेट से मंजूरी लेनी होगी। विधेयक में सम्मान के साथ शव का संस्कार 12 घंटों के भीतर करना अनिवार्य किया गया है। अगर किसी भी व्यक्ति ने शव की बेकद्री की तो थानेदार पार्थिव शरीर को कब्जे में लेकर ड्यूटी मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में अंतिम संस्कार कराएंगे।
