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Home » देश की दहाड़ से दहलेगी दुनिया!, अब हथियार मांगने वाला नहीं.. बेचने वाला बनेगा भारत, थर-थर कांपेंगे दुश्मन

देश की दहाड़ से दहलेगी दुनिया!, अब हथियार मांगने वाला नहीं.. बेचने वाला बनेगा भारत, थर-थर कांपेंगे दुश्मन

faridabadnews24By faridabadnews24April 18, 2025No Comments6 Mins Read
The world will be shaken by the roar of the country! Now India will not be the one to ask for weapons.. it will become the one to sell them, enemies will tremble in fear
IMAGES SOURCE : GOOGLE

Rajnath Singh: भारत का डिफेंस सेक्टर नई ताकत के साथ लगातार ऊंचाइयों को छू रहा है. इसी कड़ी में अब केंद्र सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ( Rajnath Singh ) ने गुरुवार को कहा कि इस साल भारत का रक्षा उत्पादन 1.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने की उम्मीद है और 2029 तक तीन लाख करोड़ रुपये मूल्य के सैन्य उपकरणों ( Military Equipment ) के निर्माण का टारगेट है.डिफेंस मिनिस्टर ने कहा कि भारत रक्षा उपकरणों के इंपोर्ट पर अपनी निर्भरता कम करेगा और एक डिफेंस इंडस्ट्रियल एनवायरोमेंट सिस्टम  नाएगा, जो न केवल देश की जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि डिफेंस एक्सपोर्ट की क्षमता को भी मजबूत करेगा. रक्षा मंत्री ने आयोजित ‘डिफेंस कॉन्क्लेव 2025-फोर्स ऑफ द फ्यूचर’ में अपने संबोधन में यह बात कही.

क्या है मकसद?
सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता ( defense capability ) का मकसद विवादों और संघर्षों को भड़काना नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत की रक्षा क्षमताएं क्षेत्र में अमन और स्थिरता बनाए रखने के लिए एक विश्वसनीय प्रतिरोधक शक्ति की तरह हैं और शांति तभी संभव है जब भारत मजबूत बना रहे.

रक्षा मंत्री ने किसकी तरफ किया इशारा
उन्होंने भारत की बढ़ती सामरिक क्षमताओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश अब मिसाइल टेक्नोलॉजी (अग्नि, ब्रह्मोस मिसाइल), पनडुब्बियों (INS Arihant), विमान वाहक पोत (INS Vikrant ), ड्रोन, साइबर रक्षा ( Cyber Defense ) और हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विकसित देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है.  राजनाथ सिंह ने कावेरी इंजन प्रोजेक्ट के अंतर्गत हुई महत्वपूर्ण प्रगति तथा घरेलू क्षमता निर्माण के लिए सफ्रान, जी.ई. और रोल्स रॉयस जैसी वैश्विक कम्पनियों के साथ चल रही चर्चाओं की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘एयरो इंजन निर्माण एक चुनौती बनी हुई है.’

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रक्षा मंत्री ने की ये घोषणा
कावेरी प्रोजेक्ट के अंतर्गत भारत ने स्वदेशी लड़ाकू जेट इंजन विकसित करने की योजना बनाई थी. इस परियोजना में काफी देरी हुई है. उन्होंने ऐलान किया कि, ‘हमारा रक्षा निर्यात इस साल 30,000 करोड़ रुपये और वर्ष 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाना चाहिए.’ राजनाथ सिंह ने कहा, ‘वह दिन दूर नहीं जब भारत न केवल विकसित देश के रूप में उभरेगा, बल्कि हमारी सैन्य शक्ति भी विश्व में टॉप पर होगी. इस साल रक्षा उत्पादन 1.60 लाख करोड़ रुपये को पार कर जाना चाहिए, जबकि हमारा टारगेट साल 2029 तक तीन लाख करोड़ रुपये मूल्य के रक्षा उपकरण तैयार करना है.’

रक्षा मंत्री ने कहा कि जहां भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमताएं ( defense manufacturing capabilities ) नेशनल सिक्योरिटी और रणनीतिक स्वायत्तता पर केंद्रित हैं, वहीं वे विनिर्माण को वैश्विक ‘आपूर्ति बाधाओं’ से भी बचा रही हैं. डिफेंस मिनिस्टर ने अपने संबोधन में स्वदेशीकरण, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व पर ध्यान केंद्रित करते हुए रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार’ भारत के टारगेट हेतु एक आकर्षक नजरिए भी प्रस्तुत किया.

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सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत न सिर्फ अपनी सीमाओं को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि इंटरनेशनल सिक्योरिटी एनवायरोमेंटल सिस्टम में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में भी अपनी स्थिति बना रहा है. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र का रिवाइवल और सुदृढ़ीकरण सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है. उन्होंने कहा कि सरकार की पहली और सबसे बड़ी चुनौती इस मानसिकता को बदलना है कि भारत अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल आयात करेगा. सिंह ने कहा, ‘आज, जहां भारत का रक्षा क्षेत्र आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहा है, वहीं वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को लचीला बनाने में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है’

सिंह ने रक्षा क्षेत्र में सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि 200 साल से ज्यादा पुराने आयुध कारखानों का निगमीकरण एक साहसिक लेकिन जरूरी कदम था. रक्षा मंत्री ने कहा, ‘आज आयुध कारखाने अपने नए स्वरूप में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और फायदा कमाने वाली इकाइयां बन गए हैं. मेरा मानना ​​है कि 200 वर्ष से भी अधिक पुराने ढांचे को बदलना इस सदी का बहुत बड़ा सुधार है.’

रक्षा मंत्री ने किया ये जिक्र
रक्षा मंत्री ने सरकार के स्वदेशीकरण कैंपेन को रेखांकित किया और सशस्त्र बलों द्वारा पांच तथा रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) द्वारा पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां जारी किए जाने का जिक्र किया. उन्होंने रक्षा बजट का 75 फीसदी हिस्सा घरेलू कम्पनियों से खरीद के लिए आरक्षित करने के सरकार के फैसले का भी जिक्र किया. सिंह ने बताया कि भारत में रक्षा उत्पादन 2014 में 40,000 करोड़ रुपये से बढ़कर आज 1.27 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है.

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‘इस साल रक्षा उत्पादन 1.60 लाख करोड़ रुपये को पार कर जाना चाहिए’
उन्होंने कहा, ‘इस साल रक्षा उत्पादन 1.60 लाख करोड़ रुपये को पार कर जाना चाहिए, जबकि हमारा टारगेट साल 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उपकरण बनाना है.’ रक्षा निर्यात के बारे में रक्षा मंत्री ने कहा कि 2013-14 में यह आंकड़ा 686 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 23,622 करोड़ रुपये हो गया है. उन्होंने कहा, ‘हमारे देश में बने रक्षा उत्पाद लगभग 100 देशों को निर्यात किए जा रहे हैं. हमारा रक्षा निर्यात इस वर्ष 30,000 करोड़ रुपये और 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाना चाहिए.’

सिंह ने विशेष रूप से युवाओं और स्टार्ट-अप के बीच इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहित करने के लिए, आईडीईएक्‍स शुरू किया गया था, जो चयनित स्टार्ट-अप को 1.5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करता है. इसकी सफलता को देखते हुए, आईडीईएक्‍स प्राइम को शुरू किया गया और यह सहायता बढ़कर 10 करोड़ रुपये हो गई. इसके अलावा, हाल ही में शुरू की गई एडीआईटीआई योजना सफल नवाचारों को बढ़ावा देने में मदद के लिए 25 करोड़ रुपये तक की सहायता प्रदान करती है.

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‘2,400 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद को मंजूरी दी’
उन्होंने आगे कहा, ‘हमारा लक्ष्य हमारे स्टार्ट-अप और एमएसएमई को मजबूत करना है और इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने स्टार्ट-अप/एमएसएमई से 2,400 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद को मंजूरी दी है और नयी प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को स्‍वीकृति दी गई है’ पोत निर्माण में भारत की सफलता पर बल देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के 97 प्रतिशत से ज्यादा युद्धपोत अब भारतीय शिपयार्ड में बनाए जाते हैं. भारत द्वारा निर्मित पोतों को मॉरीशस, श्रीलंका, वियतनाम और मालदीव जैसे मित्र देशों को भी निर्यात किया जा रहा है.

NEWS SOURCE Credit : zeenews

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